जिले के किसानों को इस बार 24 दिनों में आठ बार ही फसलों की सिंचाई के लिए नहरी पानी उपलब्ध हो पाएगा। ऐसे में किसानों को इस बात की चिंता सता रही है कि अबकी बार गेहूं की फसल कैसे पकाएंगे। लेकिन नहरी विभाग का स्पष्ट कहना है कि पानी की किल्लत के चलते ऐसा निर्णय लिया गया है।
उत्तर भारत में सिरसा जिला गेहूं उत्पादन प्रथम स्थान पर रहा है। जहां 3 लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं बोई जाती है और करीब 15 लाख मीट्रिक टन इसका उत्पादन होता है। लेकिन इस बार नहरी पानी की किल्लत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि गत वर्षों में किसानों को रबी व खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए हर माह में दो सप्ताह पानी दिया जाता है। लेकिन इस बार नहरी विभाग की तरफ से निर्णय लिया गया है कि किसानों को केवल 24 दिन में केवल एक सप्ताह पानी दिया जाएगा। सिरसा जिले में सिंचाई की चार डिविजन है। भाखड़ा के अंतर्गत आने वाले नहराणा, रोड़ी घग्गर व सिरसा डिवीजन शामिल है। नहरी विभाग के अधिकारियों की माने तो इन सभी में केवल एक सप्ताह सामान्तर पानी दिया जाएगा, सभी में केवल यही शेड्यूल रहेगा। वहीं सरसों उत्पादन की बात की जाए तो रेवाड़ी को छोड़कर प्रदेश में सिरसा जिले का दूसरा स्थान है। जिला में करीब 52 हजार हेक्टेयर में सरसों की बिजाई की जाती है। जिला में जहां 15 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन होता है वहीं प्रति एकड़ 50.50 क्विंटल गेहूं उत्पादन होता है। इसके अलावा यहां सब्जियां का उत्पादन भी अच्छा होता है।
नहरी पानी की होती है चोरियां
एक तो पीछे से पानी की भारी किल्लत किसानों को लिए सिरदर्द बनी रहती है तो वहीं ऊपर से रही कसर पानी की चोरी से निकल जाती है। बेशक विभागीय अधिकारी इस बात का दावा करते हो कि पानी चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाया जाता है, परंतु जमीनी हकीकत तो यह है कि इन सबके बावजूद पानी की चोरी नहीं रुक पा रही है। जिसके कारण टैल पर स्थित गांव को पीने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता तो वहीं सिंचाई के लिए तो उम्मीद करना ही बड़ी बात है।
कॉटस
पानी की किल्लत है। इसी के चलते इस बार केवल 24 दिन में 8 दिन पानी दिया जाएगा। पानी चोरी की तो समय-समय पर हमारी टीमें दबिश देती रहती है। पानी चोरी करने पर कार्रवाई की जाती है।
- आत्माराम, एसई नहरी विभाग