नेहा ने बताया कि तीन मई से पांच मई तक तीन दिन स्थिति काफी खराब रही। वह हॉस्टल में ही बंद रहे। उनके साथ हरियाणा के अलग-अलग जिलों के 16 विद्यार्थी थे। जिन्हें सरकार की ओर से सुरक्षित घर पर पहुंचाया गया है। गोला बारी होने के दौरान तीन दिनों तक वहां पर स्थिति काफी खराब थी। एक दिन तो उनके हॉस्टल में खाने के लिए खाना और पीने के लिए पानी की भी दिक्कत आ गई। जिसके कारण उन्हें ब्रेड और चावल खाकर गुजारा करना पड़ा था। नेट बंद होने के बाद सरकार के नंबर तक निकालने उनके लिए मुश्किल की गई है।
दूसरे राज्यों के विद्यार्थी को उनकी सरकार ने पांच तारिख को ही बुला लिया था वापस
नेहा ने बताया देशभर के विद्यार्थी एनआईटी में पढ़ाई करते है। जिसमें साउथ, झारखंड, बिहार सहित अन्य कई राज्यों के विद्यार्थियों की संख्या अधिक है। तीन को माहौल खराब होने के बाद उनके राज्यों की सरकार ने उन्हें पांच तारीख को ही वहां से बुलाना शुरू कर दिया था। इसके चलते उन्होंने भी अपनी सरकार के साथ जैसे तैसे कर संपर्क किया और अब वह वापस लौटे है।
हिंसा होने की घटना को लेकर परिवार को नहीं दी कोई जानकारी
नेहा ने बताया कि मणिपुर में हिंसा होने को लेकर पहले तीन दिनों तक उन्होंने परिवार के सदस्यों को किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी। इतना बताया था कि अब कुल दिनों तक नेट सेवाएं बंद रहेंगी और बातचीत नहीं हो पाएगी। हालांकि फोन के माध्यम से उनकी परिवार के सदस्यों के साथ हर रोज बातचीत होती थी। परिवार के सदस्य भी उनसे इस संबंध में जानकारी लेते रहते थे। बता दे कि नेहा के पिता भजन लाल एमसी कॉलोनी में ही कढ़ाई का काम करते है और उनकी माता कैलाश कौर चत्तरगढ़पट्टी स्थित स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम है।