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यूक्रेन पर रूसी हमले के बीच सिरसा के अभी भी 40 से अधिक विद्यार्थी फंसे

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यूक्रेन से वापस सिरसा लौटी एमबीबीएस की छात्रा इशिका अपने पिता राजेश गुंबर के साथ। - फोटो : Sirsa
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सिरसा। रूस की ओर से यूक्रेन पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। लोगों की निगाहें दोनों देशों में घटने वाले घटनाक्रमों पर पर टिकी हुई है। अभी भी सिरसा के 40 से अधिक विद्यार्थी यूक्रेन के अलग-अलग शहरों में फंसे हुए हैं। इनमें से कई विद्यार्थियों की 24, 25 तो कई की 26 फरवरी की फ्लाइट थी। लेकिन उससे पहले ही युद्ध शुरू हो गया और अब वे वहां पर ही फंस कर ही रह गए हैं। यूक्रेन पर हो रहे हमले को देखकर विद्यार्थियों के अभिभावकों की भी सांस अटकी हुई है।
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परिजनों का कहना है बच्चों को अभी हॉस्टल और बंकरों में रखा जा रहा है। जिसके कारण खाने और पीने को लेकर भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि बच्चों से बात होने पर वे स्थिति सामान्य होने की बात कह रहे हैं। रात के समय दूसरे क्षेत्रों में बम बारी होने से हॉस्टल की खिड़कियां और धमकों की आवाज भी उन्हें सुनने को मिल रही हैं। वहीं सिरसा निवासी राजेश अरोड़ा ने बताया कि उनका बेटा अविश अरोड़ा व सिरसा निवासी तीन अन्य छात्र भी खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एबीबीएस करने के लिए गए हुए थे। लेकिन वहां पर भी हमला होने के कारण अब कई छात्रों का अपने अभिभावकों के साथ संपर्क टूट चुका है। जिसके कारण उनके परिजनों की चिंता भी पहले से काफी अधिक बढ़ गई है।
सुरतगढ़िया चौक निवासी अविश की थी 26 की फ्लाइट
सुरतगढ़िया निवासी अविश अरोड़ा के पिता राजेश ने बताया कि सुबह बेटे के साथ संपर्क हुआ था। उसके साथ उसका रूम मेट अभोली निवासी सौरव कंबोज, बरनाला रोड निवासी योगेश शर्मा, पुलिस लाइन निवासी आशीष कुमार भी यूक्रेन में फंसे हुए है। सभी के परिजन अपने बच्चों के साथ संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन शाम को वहां पर धमाके होने के कारण स्थिति खराब हो रही है।
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मां बोली बेटे से हो रही थी बात, फिर धमाकों की आने लगी आवाज और टूट गया संपर्क
सिकंदरपुर निवासी बिमला रानी ने बताया कि उसका बेटा वैभव एमबीबीएस करने के लिए खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में चार वर्ष से पढ़ाई कर रहा है। उसकी 25 फरवरी को फ्लाइट थी लेकिन युद्ध शुरू होने के कारण अब वे वहां पर ही फंस कर रह गए हैं। शुक्रवार दोपहर 2.30 बजे उनकी अपने बेटे से बात हो रही थी इसी दौरान ही धमाकों की आवाज आनी शुरू हो गई तो उनका बेटे के साथ संपर्क टूट गया। जिसके कारण उनका डर भी पहले से अधिक बढ़ गया है। इंडियन एंबेसी भी वह संपर्क कर रहे थे लेकिन उनका संपर्क नहीं हो पा रहा था।
बंकरों में भी बढ़ गई भीड़, हॉस्टल में रह रहे थे बच्चे
सिकंदरपुर निवासी बिमला रानी ने बताया कि उनके बेटे को भी वहां की सुरक्षा एजेंसियों की ओर से बंकरों में लेजाया गया था। लेकिन वहां पर भी भीड़ अधिक होने के कारण लोगों की परेशानी बढ़ी है। बच्चों को खाने और पानी की भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हॉस्टल की ओर से कुछ बंदोबस्त किया जाता है लेकिन स्थिति खराब होने के कारण वहां पर भी खाने और पानी की समस्या आ रही है।
वापस लौटी इशिका बोली- पहले टिकट रद्द करवाने की योजना, अब लग रहा ठीक
बुधवार रात को यूक्रेन से सिरसा लौटी सुभाष कॉलोनी निवासी इशिका ने बताया कि परिवार की ओर से 18 फरवरी को फ्लाइट की टिकट बुक करवाई गई थी। तब वहां पर स्थिति सामान्य थी। जिसके बाद उसने घर वापस न आने को लेकर बात कही थी। लेकिन परिजनों ने उसे वापस बुला लिया। 22 फरवरी को वह वहां से वापस आ गई। सिरसा पहुंचने के बाद उन्हें वहां की स्थिति का पता चला। उनके कई साथी अभी भी खारकीव में फंसे हुए है। जिनसे सुबह संपर्क हो पाया था लेकिन इसके बाद उनके साथ कोई संपर्क नहीं हो पाया।
पिता बोले- पहली फ्लाइट की ही टिकट डेढ़ लाख से अधिक महंगी हो गई थी
इशिका के पिता राजेश गुंबर ने बताया कि उनकी बेटी एमबीबीएस करने के लिए दो वर्ष पहले यूक्रेन गई थी। पहले जब वह बेटी को फोन कर वापस आने के लिए कहते थे तो बेटी वहां की स्थिति सामान्य होने की बात कहती थी। उसके वापसी के लिए उन्होंने पहली ही फ्लाइट में बुकिंग करवा दी थी इसके लिए उन्हें 60 हजार का भुगतान करना पड़ा। लेकिन इसके बाद उसी फ्लाइट की टिकट डेढ़ लाख से अधिक हो गई थी। जिसके कारण कई अभिभावक अपने बच्चों की टिकट तक नहीं कटवा सके। सरकार की ओर से अगर जल्द एक्शन लिया जाता तो सभी भारतीय वापस अपने घरों में आ सकते थे।
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