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नगर परिषद सहित 150 से अधिक जर्जर भवन, बारिश में हो सकता है बड़ा हादसा

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जर्जर भवन के नीचे बनी दुकानें - फोटो : Sirsa
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सिरसा। नगर परिषद सहित शहर के 150 से अधिक खंडहर बन चुके भवन बारिश के मौसम में कभी भी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। खंडहर हो चुके भवनों को ढहाने के लिए नगर परिषद की ओर से भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। जिसके कारण खंडहर भवनों के आसपास रहने वाले लोगों को हादसा होने का भय लगा रहता है।
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बता दें कि शहर की रेलवे कॉलोनी में बरसों पुराने भवन बने हुए है। जो कभी भी गिर सकते हैं। कई भवन तो अंग्रेजों के समय के बने हुए हैं, लेकिन देखरेख के अभाव में उनकी हालत खस्ता हो चुकी है। कई भवन मालिक तो पुराने भवनों में ही रह रहे हैं या कार्य कर रहे हैं। तो कई मालिकों ने भवनों को छोड़ दूसरी जगह आशियाना बना लिया। ऐसे में उन भवनों के आसपास रहने वाले लोगों को उन इमारतों के गिरने का डर लगा रहता है। खंडहर को चुकी इमारतों को लेकर ढहाने को लेकर उसके आसपास रहने वाले लोग नगर परिषद शिकायत देते हैं लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। लोगों को कहना है कि नगर परिषद संबंधित को नोटिस जारी कर खानापूर्ति कर देती है।
नगर परिषद का खुद का भवन खंडहर
बालभवन रोड स्थित नगर परिषद का भवन भी अंग्रेजों के समय का बना हुआ है। जिसे प्रशासन की ओर से खंडहर घोषित किया गया है। लेकिन अभी भी इसी भवन में शहर का लेेखा जोखा और अन्य सभी कार्य किए जाते हैं। खंडहर भवन से कार्यालय शिफ्ट करने को लेकर नगर परिषद ने भी कई प्लान तैयार किए लेकिन कोई भी सिरे नहीं चढ़ पाया। जिसके पश्चात हुडा सेक्टर में नगर परिषद कार्यालय को शिफ्ट करने की तैयारी की थी, लेकिन हुडा सेक्टर वासियों ने इसका विरोध करते हुए कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। जिसके बाद नगर परिषद का शिफ्ट होना रुक गया। वहीं दुकानदार संदीप कुमार, रमेश कुमार, हरी राम, सुनीता रानी, ममता सैनी ने बताया कि खंडहर भवन के कारण पहले भी कई जगह पर हादसे हो चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती।
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रेलवे कॉलोनी में कई घर हो चुके जर्जर
रेलवे कॉलोनी में कई घर अंग्रेजों के समय के बने हैं। जो कि अधिकारियों और कर्मचारियों को दिए गए हैं। इनमें से कई जर्जर हो चुके हैं। कइयों की खस्ताहाल को देखते हुए कर्मचारी उनको खाली कर गए हैं। अभी भी फिलहाल कई घरों में कर्मचारी रह रहे हैं।
पुराने भवनों के गिरने से हो चुके है कई बार हादसे
शहर के नोहरिया बाजार में दो सप्ताह पहले ही पुराने भवन का एक हिस्सा गिरने के कारण एक व्यक्ति की चोटें आई थीं। वहीं भादरा तालाब के साथ बने कई मंदिर भी खंडहर हो चुके है। इन मंदिरों के सामने के गेट तो संचालकों की ओर से नए बनाए गए हैं लेकिन पूजा पाठ का कार्य पुराने भवनों में ही किया जाता है। शहर के नेशनल कॉलेज, सिविल लाइन थाना, नागरिक अस्पताल के भी कई भवन भी पुराने है। महिला कॉलेज के पुराने भवन को बंद कर दिया गया है लेकिन अभी भी इसे ढहाया नहीं गया है।
जर्जर भवनों के कारण शहर के कई क्षेत्रों में पहले भी हादसे हो चुके हैं। जिसके कारण लोगों को काफी नुकसान भी हुआ है। प्रशासन को खंडहर भवनों को ढहाने के लिए कार्य करना चाहिए। वार्ड की रेलवे कॉलोनी भी काफी समय पुराने घरों में बसी है। उनको भी हटाने का कार्य किया जाना चाहिए।
-ममता सैनी, पार्षद, वार्ड 6
शहर में कई स्थानों पर पुराने भवन बने हुए हैं। शहरवासियों की शिकायत आने के बाद ही पुराने भवन मालिकों को कार्रवाई का नोटिस दिया जाता है। इनके बारे में कम लोग ही शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
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-राजेश कुमार, जेई, नगर परिषद

डबवाली रोड के साथ खड़ा जर्जर भवन - फोटो : Sirsa

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