सुबह छह बजे से खाद केंद्र पर डटे रहे किसान, 11 बजे तक टोकन नहीं मिलने पर फूटा गुस्सा
आधे घंटे तक डबवाली रोड पर थमी वाहनों की रफ्तार
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। रबी सीजन की बोआई से पहले डीएपी खाद की कमी से किसान शुक्रवार को चिंतित दिखे। सुबह करीब छह बजे से किसान बिक्री केंद्र पर टोकन के लिए कतार में खड़े थे। सुबह 11 बजे तक टोकन न मिलने पर किसानों ने डबवाली रोड पर जाम लगा दिया।
किसानों का कहना था कि गेहूं समेत अन्य रबी फसलों की बोआई का समय नजदीक है। खेतों में खाद की जरूरत बढ़ गई है, लेकिन उन्हें डीएपी के लिए घंटों कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। किसानों ने कहा कि वे खेती का काम छोड़कर खाद लेने आ रहे हैं।
इसके बावजूद टोकन और खाद मिलने की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। शुक्रवार को बिक्री केंद्र पर करीब 500 किसान पहुंच गए थे। किसानों की संख्या उपलब्ध खाद की मात्रा से अधिक होने से भीड़ बढ़ गई।
किसानों को आशंका थी कि घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें डीएपी के बिना लौटना पड़ सकता है। किसानों का आरोप था कि सुबह छह बजे से लाइन में खड़े होने पर भी 11 बजे तक टोकन जारी नहीं हुए। इससे किसानों में नाराजगी बढ़ती गई और उन्होंने विरोध शुरू कर दिया।
अधिकारियों का हस्तक्षेप
जाम की सूचना मिलते ही कृषि विभाग के अधिकारी और पुलिस कर्मचारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत की। उन्होंने किसानों को खाद उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने वितरण व्यवस्था सुचारू रखने का भी भरोसा दिलाया। इसके बाद किसानों ने करीब आधे घंटे बाद जाम खोल दिया। यातायात सामान्य हो गया।
पारदर्शी वितरण की मांग
किसानों ने प्रशासन से डीएपी की उपलब्धता और वितरण पर स्पष्ट जानकारी मांगी। किसानों का कहना है कि जिस केंद्र पर जितनी खाद उपलब्ध है, उसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए। कितने किसानों को खाद दी जानी है, यह भी बताया जाए। किसानों ने आधार कार्ड जमा कराने, टोकन जारी करने और खाद वितरण के लिए अलग-अलग काउंटर बनाने की मांग की। उन्होंने केंद्रवार खाद का भंडार और वितरण का समय पहले घोषित करने को कहा। इससे किसान खेती का काम छोड़कर पूरा दिन कतार में खड़े रहने से बच सकेंगे।
डीएपी की आवश्यकता
किसानों ने कहा कि रबी सीजन के दौरान करीब 47,316 मीट्रिक टन डीएपी की आवश्यकता का आकलन किया गया है। आने वाले दिनों में रबी फसलों की बोआई तेज होने के साथ डीएपी की मांग भी बढ़ेगी। किसानों का कहना है कि पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता जरूरी है। इसके साथ ही उसके वितरण की व्यवस्थित व्यवस्था करना भी आवश्यक है।