सिरसा। स्वास्थ्य सेवाओं को इमरजेंसी सेवाएं भी कहा जाता है, लेकिन शहर के नागरिक अस्पताल में ये सेवाओं ही खुद इमरजेंसी में हैं। इसे सरकारी सुविधाओं का अभाव कहें या लापरवाही कि नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन सुबह 8 बजे सामान्य मरीजों की ओपीडी शुरू हो जाती है और 8.30 बजते ही अल्ट्रासाउंड केंद्र में जांच के लिए प्रवेश बंद कर दिया जाता है। ऐसा इसलिए कि केवल आधे घंटे में ही अल्ट्रासाउंड केंद्र हाउस फुल हो जाता है। ऐसे में मरीजों खासकर गर्भवती महिलाओं को नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 24 से 48 घंटों तक का इंतजार करना पड़ता है।
शहर के नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 800 से लेकर 1000 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें प्रसूता वार्ड में महिला रोगियों की संख्या 100 से अधिक होती है। प्रसूता वार्ड में आने वाली लगभग प्रत्येक गर्भवती महिला को अल्ट्रासाउंड जांच की जरूरत पड़ती है। इसलिए प्रतिदिन औसतन 80 महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच करवानी होती है। इसके अलावा अन्य ओपीडी में से भी प्रतिदिन औसतन 10 से 15 मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए कतार में होते हैं। अब समस्या यह है कि यहां केवल एक ही अल्ट्रासाउंड मशीन है। अल्ट्रासाउंड केंद्र आठ बजे से दोपहर दो बजे तक ही चलता है। एक दिन में यहां केवल 50 से 60 मरीजों की अल्ट्रासाउंड जांच हो पाती है। अन्यों को अगले दिन का समय देकर वापसी का रास्ता दिखा दिया जाता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि प्रतिदिन 50 से ज्यादा मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए या तो अगले दिन का इंतजार करना पड़ता है या फिर निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र पर जाकर 600 से 800 रुपये का भुगतान करके जांच करवानी पड़ती है। बदहाल व्यवस्था का आलम यह है कि सुबह 8 बजे ओपीडी शुरू होने के केवल आधे घंटे बाद ही 8.30 बजे अल्ट्रासाउंड केंद्र पर रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया जाता है। ऐसे में बड़ी समस्या ये है कि मरीज जाए तो जाए कहां? संवाद
वहीं नागरिक अस्पताल आए मरीज ने बताया कि बीते शुक्रवार को डॉक्टर ने मेरा अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए लिखा था। जांच के दौरान अधिक देरी हो गई, तो मेरी पर्ची भी अल्ट्रासाउंड केंद्र में जमा नहीं हो पाई। शनिवार को पर्ची जमा करवाई गई तो सोमवार को जांच करवाने के लिए बुलाया गया। अब जब जांच के लिए आए हैं, तो डॉक्टर के छुट्टी पर होने की जानकारी देकर मुझे मंगलवार को बुलाया गया है। इसके लिए बार बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
डॉक्टर छुट्टी पर, तो ठप हो जाता है कामकाज
अल्ट्रासाउंड केंद्र पर जांच करने वाली सोनोलॉजिस्ट यदि छुट्टी पर हो तो केंद्र पर कामकाज पूरी तरह ठप हो जाता है। अस्पताल प्रशासन के पास कोई दूसरा विकल्प ही उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उस दिन सभी मरीजों को लौटना पड़ता है, जिन मरीजों की पहले से पर्ची जमा की होती है। इन मरीजों को भी अगले दिन बुलाया जाता है। जबकि जो नए मरीज अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए पहुंचते हैं तो उन्हें दो से तीन दिन का समय तक दे दिया जाता है।
ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे मरीजों को अधिक परेशानी
नागरिक अस्पताल में हर रोज 100 के लगभग गर्भवती महिलाएं जांच करवाने के लिए पहुंचती है। इनमें से 70 फीसदी महिलाओं को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए भेजा जाता है। ऐसे में जांच के बाद अगले दिन मरीजों को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए बुलाया जाता है। हालांकि इनमें सबसे अधिक महिलाएं ग्रामीण क्षेत्र की होती है। इन्हें आने जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मरीजों को भी अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए बार-बार चक्कर काटने पड़ते हैं।
मरीजों की पीड़ा की कहानी, उन्हीं की जुबानी
मैं अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए पहले भी पत्नी को लेकर आया था, लेकिन लेट होने के कारण पर्ची जमा कर ली गई और उससे अगले दिन सुबह आठ बजे बुलाया गया। इसके बावजूद जांच नहीं हो पाई। यहां तक अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए रोष जताना पड़ा, तब जाकर नंबर लग पाया है। अब भी जांच करवाने के लिए आए हं, लेकिन डॉक्टर छुट्टी पर होने की जानकारी देकर उन्हें वापस भेजा दिया है।
अक्षय कुमार, परिजन, रानियां
अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए तीन दिनों से चक्कर काट रहे हैं। पत्थरी का दर्द होने के कारण डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड करवाने के लिखा है। यहां पर भीड़ अधिक होने के कारण पर्ची जमा नहीं हो पाती और अगले दिन जांच करवाने के लिए बुलाया जाता है। पहले भी तीन बार केंद्र पर आ चुके हैं। - सुभाष, मरीज
केवल एक मशीन और एक ही डॉक्टर होने के कारण मरीजों को परेशानी तो होती है। जिलेभर के मरीज जांच करवाने के लिए पहुंचते हैं। विभाग को नए एमओ दिए गए थे, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट ने ज्वाइन नहीं किया। इसके कारण परेशानी आ रही है। - डॉ. मनीष बांसल, सिविल सर्जन, सिरसा।
नागरिक अस्पताल में जांच करवाने के लिए पर्ची खिड़की पर लगी मरीजों की लंबी कतार । संवाद- फोटो : Sirsa