सिरसा। बेगू रोड स्थित वीटा मिल्क प्लांट में समितियों ने शनिवार को भी अपना धरना जारी रखा। समितियों के पदाधिकारी जहां धरने पर बैठे हुए थे, वहीं बोर्ड के पदाधिकारियों की वीटा प्लांट के अंदर अहम बैठक हुई। बैठक के बाद बोर्ड के पदाधिकारियों ने समितियों को आश्वासन दिया कि एक फरवरी को होने वाली बैठक में उनका कुछ भुगतान जारी कर दिया जाएगा और बंद पड़ी समितियों को शुरू करवाया जाएगा। जिसके बाद समितियों ने एक फरवरी तक के लिए धरना स्थगित कर दिया गया।
इसके दूसरी तरफ वीटा प्लांट प्रबंधन समितियों पर रिकवरी डालता है तो कई पूर्व अधिकारी और मौजूदा कर्मचारियों पर गाज गिरना तय है। इसकी वजह है कि समितियों को ज्यादा भुगतान किए जाने के पीछे मिलीभगत की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। इसी का डर प्लांट के कुछ लोगों को सता रहा है। इसके इतर एक और परेशानी वाली बात है कि प्लांट में मिलावटी दूध की सप्लाई भी सामने आई है। वीटा का दूध, पाउडर आंगनबाडी केंद्रों को दिया जाता है। इससे नौनिहालों के शारीरिक और बौद्धिक विकास पर असर पड़ सकता है।
एक माह में प्रबंधन इस तरह की मिलावट पकड़ी
1 - दूध में मोबिल ऑयल की मिलावट सैंपल जांच के दौरान सामने आई। जिसके बाद प्रबंधन ने कई क्विंटल दूध नालियों में बहा दिया।
2 - सैंपल जांच में दूध में नमक की मात्रा अधिक मिली। जब इसकी जांच की गई तो पता चला कि नमक की मात्रा दूध में बढ़ाने से फैट की मात्रा बढ़ती है। जिससे बाजार से दूध की कीमत ज्यादा लगती है।
3- दूध में वसा व अन्य चीजों की बढ़ोतरी को लेकर दूध में सिंघाड़े व चावल के आटे की मिलावट की जाती है।
यह भी चलता आ रहा था खेल
अधिकारियों की माने तो पानी से दूध की मात्रा बढ़ाने में बड़े स्तर पर खेल चलता है। समितियों के साथ कुछ अंदर के लोग भी इसमें मिले हो सकते हैं। वीटा का दूध लेकर आने वाले टैंकर में ऊपर नीचे दो कैबिन बने होते है। ऐसे में एक केबिन में पानी भर लिया जाता है और एक कैबिन में समिति से दूध लेकर आते है। दोनों का वेट करवाने के बाद मिलीभगत कर पानी को टैंकर से खाली कर दिया जाता है। ऐसे में वेट पानी और दूध का होता है। इससे जहां समिति को मुनाफा होता है। वहीं प्लांट को लाखों का नुकसान होता है।
मोबिल ऑयल का प्रयोग लीवर व अन्य हिस्सों को प्रभावित करता है। समय रहते पता न चले तो मौत भी हो सकती है। चावल व सिंघाडे के आटे का घोल दूध में मिलाने से और सेवन करने से आंतों में सूजन आ जाती है और लीवर खराब हो जाता है। नमक की मात्रा ज्यादा होती है तो किडनी की समस्या होगी। उसके बाद बीपी बढ़ना शुरू होगा। लंबे समय तक इसका प्रयोग किया जाए तो शरीर में विभिन्न बीमारियों हो सकती हैं।
-डॉ. भारत भूषण, बालरोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल
बोर्ड की बैठक के बाद सदस्यों ने समितियों का धरना स्थगित करवाया है। समितियों की रिकवरी और उनको भुगतान को लेकर एक फरवरी को फिर से बैठक होगी। हमारा प्रयास है कि वीटा प्लांट के साथ धोखाधड़ी करने वाले लोग भले ही कोई भी हो, सामने आने चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जो मेरे स्तर पर कार्रवाई हो सकती है, वह होगी और एमडी स्तर की कार्रवाई एमडी द्वारा होगी। प्लांट के उत्पादों की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।
-चरणजीत सिंह, चेयरमैन, वीटा मिल्क प्लांट