राजनीति में उतरकर चुनाव में भाग लेने का बयान देकर विवादों में आ चुके किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी का एक बार फिर दर्द छलका उठा। राजनीति में भागीदारी का पक्ष लेते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त मोर्चा को ऐलनाबाद उपचुनाव में अपना उम्मीदवार उतारना चाहिए था।
सक्रिय राजनीति में उतरने के पक्षधर गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि राज बिना तो धर्म भी नहीं चल सकता, हम तो फिर भी आंदोलन चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज स्थिति ये है कि जिनके पास वोट हैं, उनके पास राज नहीं है और जिनके पास राज है, उनके वोट ही नहीं है। जिनके वोट हैं, किसान वे तो सड़कों पर प्रदर्शन करके डंडे खाने का काम कर रहे हैं। कॉर्पोरेट घरानों के पास वोट नहीं है लेकिन वे देश पर राज कर रहे हैं।
आंदोलन की मजबूती के सवाल पर चढूनी ने कहा कि अच्छा तो तब होता जब संयुक्त मोर्चा को अपना उम्मीदवार यहां मैदान में उतारना चाहिए था। क्योंकि जब तक आम जनता विधानसभा और संसद में नहीं जाएंगे, तब तक बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हमने विधानसभा और संसद में डाकू बैठा दिए। ये देश को लूट रहे हैं।
गुटबंदी आई नजर, टिकैत ग्रुप ने बनाई दूरी
चढूनी के सिरसा और ऐलनाबाद दौरे के दौरान टिकैत ग्रुप के लोगों ने दूरी बनाए रखी। किसान आंदोलन को लेकर गुटबाजी के सवाल पर उन्होंने कहा कि दो तरह के घोड़े होते हैं, जंगी घोड़े और दरबारी घोड़े। बदकिस्मती ये है कि लोग दरबारी घोड़ों को ज्यादा पसंद करते हैं जबकि जंगी घोड़ों को पसंद नहीं किया जाता। चढूनी ने कहा कि ये किसान आंदोलन केवल आंदोलन नहीं है बल्कि धर्मयुद्ध है।