ओढां। कोहरे व ठंड शुरू होते ही खुले में घूम रहे गोवंश को एक जगह से दूसरी जगह छोड़ने का सिलसिला शुरू हो गया है। खेतों की रखवाली करने वाले घुड़सवार व अन्य लोग रात के अंधेरे में गोवंश को एक-दूसरे गांवों में छोड़ देते हैं। ये गोवंश सड़क दुर्घटनाओं कारण बनता हैं। ऐसे में सर्द रातों में किसान अपनी फसल को बचाने के लिए खेतों व अपने-अपने रकबा क्षेत्रों की सीमा पर डेरा डालने को मजबूर देखे जा रहे हैं।
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गांव नुहियांवाली सहित आस-पड़ोस के गांवों में इन दिनों काफी संख्या में बेसहारा गोवंश घूम रहा है। उक्त गोवंश ने किसानों की जान सांसत में डाल रखी है। बेसहारा पशुओं की बढ़ती तादाद के समक्ष गोशालाओं ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि गोशालाओं में तो पहले से भी पशुओं की भरमार है। इसके चलते उन्हें चारा आदि की किल्लत से पहले ही दो-चार होना पड़ रहा है। दूसरा ठंड के मौसम में ज्यादा पशुओं को रखने के लिए जगह भी अपर्याप्त है। सरकार द्वारा गोशालाओं में मौजूद गोवंश की समय-समय पर संख्या रिपोर्ट मांगी जाती है, लेकिन खुले में घूम रहे गोवंश की रिपोर्ट कभी नहीं मांगी जाती। खुले में घूम रहे पशुओं से कोई भी गांव अछूता नहीं है। लोग इनकी बढ़ती तादाद के लिए अमेरिकन नस्ल को जिम्मेदार मानते हैं। इन पशुओं के झुंड रात को जब खेतों में किसानों के अरमानों पर तबाही मचाते हैं तो मजबूरन किसानों को इसका विकल्प ढूंढते हुए घुड़सवार रखवालों को मोटी राशि देकर रखवाली करवानी पड़ रही है।
गोशाला में पहले से ही बहुत ज्यादा गोवंश है। फिर भी हमारी कोशिश रहती है कि गोवंश बेसहारा न घूमे। हमने गांव मेें घूम रहे कुछ गोवंश को गोशाला में रखा भी है। रात के समय बाहर से गोवंश छोड़ा जाता है। इतने गोवंश को गोशाला में कैसे रखें।
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- महेंद्र निमीवाल, प्रधान (गौशाला नुहियांवाली)।
किसान खेतों की रखवाली के लिए कुछ लोगों को रख लेते हैं। किसानों की नजर में तो ठीक है लेकिन गोवंश पर अत्याचार है। उक्त रखवाले बाहरी क्षेत्रों में रखवाली का ठेका लेकर गोवंश को एक-दूसरी जगह छोड़ देते हैं। इसका समाधान ये है कि सभी लोग मिलकर गोशालाएं खोलें। -योगेश बिश्नोई, जिलाध्यक्ष (गोशाला महासंघ)