संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। डबवाली की नंदीशाला में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इसमें कथावाचक पलक किशोरी ने श्रीमद्भागवत कथा महापुराण के मात्र श्रवण से ईश्वर की कृपा और ज्ञान की अनुभूति पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि जितना वह लोगों से मिलती हैं, उतना ज्ञान प्राप्त होता है। भगवान प्रतिदिन नई दिशा दिखाते हैं और यह अलग-अलग साधनों से हो सकता है।
यह सब भगवान की कृपा है। उन्होंने कहा कि भगवान हर कण-कण में बसते हैं। जो कुछ भी हो रहा है, वह भगवान की कृपा से ही हो रहा है। हर घटना के पीछे कोई न कोई उद्देश्य अवश्य होता है और वह भी भगवान की लीला का हिस्सा होता है। उन्होंने कहा कि जिनके मन में प्रत्येक प्राणी के लिए प्रेम व दया है, वह व्यक्ति हमेशा भगवान को प्रिय होता है तो सदैव दया व प्रेम की भावना मन में रखें।
लॉकडाउन में माता-पिता ने कराया कथा का अभ्यास
पलक किशोरी ने कहा कि जब वह श्रीमद्भागवत कथा का पाठ करती हैं तो विशेष प्रकार की आध्यात्मिक अनुभूति महसूस होती है। उन्हें खुद पता नहीं होता कि उनके मुख से क्या निकल रहा है। जो शब्दवाणी निकलती है कि वह भगवान की कृपा से ही निकलता है। पलक किशोरी ने बताया कि लॉकडाउन के समय उनके माता-पिता ने उन्हें श्रीमद्भागवत कथा का अभ्यास कराया, जिससे उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि इस दौरान वे श्रीमद्भागवत कथा और उसके ज्ञान के करीब आईं। इससे उनके जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आए। पलक किशोरी ने युवाओं से आग्रह किया कि श्रीमद्भागवत कथा और गीता के उपदेशों का अध्ययन करें और उनकी शिक्षाओं का पालन करें। उन्होंने कहा कि यह न केवल आध्यात्मिक शांति देता है, बल्कि जीवन को नई दिशा देने में भी सहायता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि जब हम भगवान को अपना मित्र बना लेते हैं, तो जीवन के संघर्ष भी आसान हो जाते हैं।