घग्गर का जलस्तर शनिवार को 15 हजार 250 क्यूसिक हो गया। बीते दिन करीब 11300 क्यूसिक था। घग्गर के किनारे बसे गांवों के ग्रामीण अपने स्तर पर निगरानी कर रहे हैं। वहीं गांव नकौड़ा में शुक्रवार रात को युवक गुरमीत सिंह तटबंध की निगरानी करने के लिए घग्गर पर गया। इसी दौरान घग्गर के किनारे ट्रैक्टर मोड़ते समय अनियंत्रित होकर पलट गया। ट्रैक्टर पलटने से युवक नीचे दब गया। करीब आधे घंटे बाद किसी राहगीर ने ट्रैक्टर पलटे हुए देखा तो उसने आसपास के किसानों को सूचना दी। जब तक युवक गुरमीत सिंह को निकाला जाता, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। परिजनों ने शनिवार को युवक का अंतिम संस्कार कर दिया।
घग्गर किनारे बसे गांव मल्लेवाला, सहारणी और बडागुढ़ा में प्रशासन की ओर से पंचायतों की मदद से घग्गर नदी के तटबंधों पर मिट्टी डालने के लिए बैग, जेसीबी मशीन एवं डीजल उपलब्ध करवाया गया है। गांवों में ठीकरी पहरा दिया जा रहा है और ग्रामीण तटबंधों को मजबूत करने में लगे हैं। बड़ागुढ़ा के खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी वेदपाल ने कई गांवों में जाकर स्थिति का जायजा लिया। वे गांव बुढ़ाभाणा में पहुंचे और नाव में बैठकर नदी में जलस्तर का मुआयना किया। उनके साथ सरपंच रघुबीर सिहाग भी मौजूद थे। इस दौरान नाव में लीकेज की वजह से पानी भर जाने की समस्या पर उन्होंने संज्ञान लेते हुए तुरंत विभाग को सही नाव उपलब्ध करवाने जाने के निर्देश दिए। गांव मल्लेवाला के सरपंच दर्शन सिंह ने बताया कि फिलहाल सरकारी बांध को मजबूत किया जा रहा है। गांव के लोग ट्रैक्टरों के जरिए मिट्टी डाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से उन्हें तीन जेसीबी मशीनें भी मुहैया करवाई गई हैं। लहंगेवाला के सरपंच संदीप सिंह ने बताया कि अभी तो जलस्तर स्थिर है। पर उनके गांव में बांध अधिक मजबूत नहीं है। अगर जलस्तर थोड़ा भी बढ़ा तो समस्या आ सकती है।
ओटू हेड में शाम पांच बजे मुख्य तटबंध की जगह धंसी
ओटू हेड में शाम पांच बजे के आसपास घग्गर के मुख्य तटबंध के लेफ्ट साइड में जगह धंस गई। इसकी सूचना मिलते ही सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने तुरंत ही उस जगह पर मिट्टी डालने का काम शुरू कर दिया। सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता एनके भोला ने बताया कि मुख्य तटबंध में थोड़ा सा क्रेक आया था, लेकिन मौके पर कर्मचारियों ने तुरंत ही स्थिति को कंट्रोल में कर लिया। पानी स्थिर है। एक दो दिन तक स्थिति ऐसी ही बनी रहेगी।
कहां कितना जलस्तर
गुहला चीका 39,064
खन्नौरी 14,000
चांदपुर 11,700
ओटू 15,250
नाव बनी सहारा
घग्गर के उफान पर आने के बाद अब गांव बुढ़ाभाणा में आधा दर्जन गांव के लिए नाव ही सहारा बनी हुई है। गांव बुढ़ाभाणा घग्गर के तट पर बसा है। नदी के दूसरी पार बरनाला रोड पर गांव फरवाईं खुर्द है। नदी के जरिए गांव से सिरसा शहर की दूरी 11 किलोमीटर है। नदी के रास्ते के जरिए ही पंजाब की दूरी भी बेहद कम है। ऐसे में आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों लोग नदी पर पुल बनाने की मांग करते आ रहे हैं। अनेक बार सरकारी फाइलों में भी पुल की योजनाएं बनीं, लेकिन सिरे नहीं चढ़ी। इस किश्ती के जरिए ही रोजाना छात्राएं, किसान, मजदूर सफर करते हैं और अपने गंतव्य पर पहुंचते हैं। नदी में जब तीन फीट से कम पानी होता है तो एक जुगाडनुमा पुल के जरिए लोग नदी पार करते हैं। 21 गांव की पंचायतों ने प्रस्ताव पारित कर भी यहां पर पुल बनाए जाने की मांग की थी।
इन गांवों ने भेजे प्रस्ताव
गांव के सरपंच रघुबीर सिहाग बताते हैं कि इस पुल बनाने की मांग को लेकर गांव बुढ़ाभाणा, किराड़कोट, नागोकी, अलीकां, रंगा, पनिहारी, भरोखां, बरुवाली, संघर सरिस्ता, बुर्जकर्मगढ़, फरवाईं खुर्द, फरवाईं कलां, नेजाडेला खुर्द, मल्लेवाला, सहारनी, बुर्जभंगू, बप्पां पंचायतों ने प्रस्ताव पारित कर प्रशासन को दिए थे।
अभी यह मामला मेरे नोटिस में नहीं है। अगर पंचायत के लोग मुझसे मिलते हैं और इस तरह की कोई जरूरत है तो वे अवश्य ही इस दिशा में कदम उठाएंगे। अगर प्रस्ताव आता है तो जरूर पुल का एस्टीमेट तैयार करवाया जाएगा।
- अशोक गर्ग, उपायुक्त, सिरसा।