सिरसा। शहर की स्वच्छता को लेकर प्रशासन बड़े-बड़े दावे करता है। लेकिन धरातल पर ऐसा कुछ नजर नहीं आता। 4 लाख की आबादी वाले शहर से प्रतिदिन 100 टन से ज्यादा कचरा निकलता है। लेकिन सच्चाई ये है कि पूरे शहर की न तो नियमित रूप से सफाई का प्रबंध है और ना ही कूड़ा उठान का। ऐसे में स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू होने वाला है। लेकिन शहर की सुंदरता पर पांच बड़े दाग ऐसे हैं जो ना केवल रैंकिंग गिराने के लिए बड़ा कारण साबित होंगे। बल्कि शहरवासियों के लिए परेशानी भी है। प्रशासन की मजबूरी ये है कि सफाई कर्मचारियों की कमी है और प्रस्ताव भेजने के बावजूद संसाधन उपलब्ध नहीं करवाए जा रहे हैं।
शहर को साफ और स्वच्छ बनाए रखने की जिम्मेदारी अकेले प्रशासन की नहीं है। इसमें शहरवासियों का भी योगदान रहता है। लेकिन शहर के लोग ही कूड़ा फैलाने का काम कर रहे हैं। प्रशासन मैन पावर और संसाधनों का अभाव झेल रहा है। ऐसे में मार्च में शुरू होने वाला स्वच्छता सर्वेक्षण का रिपोर्ट कार्ड कैसा होगा, इसे लेकर अधिकारी चिंता में हैं। नगर परिषद प्रतिदिन नई योजना बनाकर काम करता है ताकि शहर में सफाई सुनिश्चित की जा सके और कूड़ा उठान भी जल्द से जल्द हो। लेकिन शहरवासी खुले में कूड़ा फेंककर कर्मचारियों और अधिकारियों की मेहनत पर पानी फेर देते हैं।
शहर की सुंदरता पर पांच दाग, इन्हें सुधार लिया तो रैंकिंग में सुधार की उम्मीद
स्थान : गोशाला रोड
समय : 11.05 बजे
गोशाला रोड पर गंदगी का आलम नजर आया। सड़क किनारे खुले में कचरा पड़ा मिला। कई जगह कूड़े में सूअर और बेसहारा जानवर मुंह मारते हुए नजर आए। गोशाला के गेट से थोड़ा आगे सड़क किनारे खुले में कचरे के ढेर लगे मिले। पहली नजर में ही ऐसा प्रतीत हो रहा था कि इसे दो दिन से नहीं उठाया गया हो। इतना ही नहीं यहां प्लास्टिक कचरा हवा के साथ उड़ता हुआ भी नजर आया।
स्थान : भादरा बाजार
समय : 11.20 बजे
भादरा बाजार स्थित गुड़ मंडी में थोक की दुकानें हैं। सुबह दुकान पर आने के बाद दुकानदार सफाई करते हैं और खुले में कचरा फेंक देते हैं। हालांकि नगर परिषद के कर्मचारी सुबह 6 से 7 बजे के बीच सफाई करके चले जाते हैं। इसके बाद दुकानदार कचरा फैलाते हैं।
स्थान : हिसारिया बाजार
समय 11.30
हिसारिया बाजार में भी सफाई की अव्यवस्था नजर आई। बाजार में खुले में कचरा फैला हुआ मिला। यहां भी दुकानदारों ने नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों की मेहनत पर पानी फेर दिया और दुकान में सफाई के बाद कचरा खुले में फेंक दिया।
स्थान : अनाज मंडी
समय 11.50 बजे
अनाज मंडी में राजकीय विद्यालय है। यहां स्कूल के गेट के पास ही खुले में कूड़ा फेंका जा रहा है। गेट के पास हालांकि कोई कूड़ा डंपिंग प्वाइंट नहीं है लेकिन इसके बावजूद सफाई कर्मचारी ही यहां कूड़े के ढेर लगा देते हैं। इसके अलावा आसपास के लोग भी यहां कूड़ा फेंकते हैं। ऐसे में गंदगी का माहौल रहता है। शिक्षा के मंदिर के पास सुबह-सुबह विद्यार्थियों को कचरे और उससे उठती बदबू का सामना करना पड़ता है।
स्थान : रेलवे रोड
समय : 12.10 मिनट
शहर के सांगवान चौक से रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले रेलवे रोड पर भी गंदगी का आलम नजर आया। यहां कूड़े के ढेर हैं और कूड़ा उठान का भी प्रबंध नहीं है। आसपास के लोगों ने बताया कि नगर परिषद कर्मचारी कभी-कभार यहां कूड़ा उठाने आते हैं। इस कारण पूरे क्षेत्र में गंदगी और बदबू का माहौल है।
लापरवाही : कूड़ादान से दुकानदारों का परहेज
नगर परिषद की ओर से शहर में कूूडे़दान स्थापित किए गए हैं। लेकिन दुकानदार इसमें कूूड़ा डालने से परहेज करते हैं। अधिकतर दुकानदार खुले में कचरा फेंकते हैं। लेकिन दुकानदारों नरेश कुमार, दीपक, मोहन लाल, सेठी, अजय कुमार का कहना है कि कूड़ेदान भर जाएं तो नगर परिषद के कर्मचारी इन्हें खाली करने के लिए भी कई-कई दिन तक नहीं आते हैं। इसलिए दुकानदारों को खुले में कूड़ा फेंकना पड़ता है। इतना ही नहीं कई स्थानों से ये कूड़ादान ही गायब हो चुके हैं। जिनमें सरकूलर रोड स्थित शहीद जगदेव चौक, पुराना बस अड्डा, गोल डिग्गी सहित स्थानों से ये कूड़ादान गायब हो चुके हैं।
सफाई कर्मचारियों की कमी झेल रहा नगर परिषद
शहर की आबादी के हिसाब से कम से कम 500 कर्मचारियों की जरूरत हैं जो प्रतिदिन सफाई कर सकें। लेकिन इस समय नगर परिषद के पास केवल 210 कर्मचारी ही हैं। इन कर्मचारियों से पूरे शहर की सफाई प्रतिदिन करना संभव नहीं है। क्योंकि इनमें से भी 60 से ज्यादा कर्मचारी वीआईपी ड्यूटी में रहते हैं। अधिकारियों की कोठियों पर होने के कारण वे बाजारों में नहीं जा सकते। इसलिए रोटेशन अनुसार कॉलोनियों में हफ्ते में एक या दो बार सफाई की जाती है। इसके अलावा यदि कहीं से लिखित में शिकायत आ जाए तो वहां कर्मचारियों को भेजकर सफाई करवा दी जाती है।
संसाधनों की कमी, प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दे रहे अधिकारी
नगर परिषद का प्रयास है कि शहर में बने सभी स्थायी डंपिंग प्वाइंट को खत्म कर दिया जाए। इसके स्थान पर 40 डंपर और 20 से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉली की मांग करते हुए प्रस्ताव अधिकारियों को भेजा गया है। लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिली है। ये प्रस्ताव नगर परिषद की हाउस की बैठक में भी पास किया जा चुका है। इसके बावजूद संसाधन उपलब्ध नहीं हो पा रहे। इससे भी अव्यवस्था रहती है और बिना संसाधन के कर्मचारी भी कैसे काम कर पाएंगे, उनकी मजबूरी है।
शहर की सफाई नियमित रूप से करने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई हुई है। हमारा प्रयास है कि पूरा शहर स्वच्छ रहे। इसके लिए शहरवासियों को भी जागरूक होना होगा। मिलजुल कर ही शहर को स्वच्छ रखा जा सकता है। हमारी गुुजारिश है कि लोग कूड़ेदान में ही कूड़ा डालें।
---पवन कंबोज, सफाई निरीक्षक, नगर परिषद, सिरसा।