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किसान हुए परेशान, धान में नमी बताकर एजेंसी ने नहीं की खरीद , पांच दिन में बिकी केवल 357 क्विंटल धान

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धान की नमी जांचते हुए एजेंसी व आढ़ती एसोसिएशन के सदस्य। - फोटो : Sirsa
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सिरसा। जिले की मंडी में पीआर धान की सरकारी खरीद शुरू हुई लेकिन आढ़ती व किसान खरीद एजेंसी के नमी माप यंत्र पर सही से कार्य ना करने के आरोप लगा रहे हैं। सिरसा अनाज मंडी में शुक्रवार को एक ही ढेरी पर दो नमी माप यंत्रों के परिणाम हैफेड़ एजेंसी से कम रहे। आढ़ती एसोसिएशन ने मांग की है कि मार्केट कमेटी उन्हें भी खरीद के लिए नमी जांच यंत्र रखने की अनुमति दें ताकि किसानों के धान की सही से खरीद हो सके।
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हैफेड एजेंसी द्वारा 12 बजे कपास मंडी से खरीद शुरू की। शुरूआती जांच में चार ढेरियों में नमी की मात्रा अधिक होने पर खरीद नहीं की गई। पांचवीं ढेरी पर भी नमी की मात्रा जब अधिक बताई गई तो मंडी आढ़तियों ने नमी जांचने के लिए अपना नमी यंत्र मंगवा लिया। एजेंसी द्वारा धान में नमी की मात्रा 19 आई लेकिन जब दूसरे में मीटर में जांचा गया तो 16.9 आई। आढ़तियों व किसानों द्वारा एजेंसी के नमी जांच मीटर का संदेह हुआ तो तीन अन्य ढेरियों को जांचा लेकिन उनमे भी एजेंसी की रीडिंग अन्य के मुकाबले अधिक आई, जिससे ढेरियों की खरीद नहीं हुई। आढ़तियों ने कहा कि अगर इस रफ्तार से खरीद हुई तो मंडी में परमल धान के ढेर लग जाएंगे। मंडी में शुक्रवार को 11 किसानों के टोकन कटे व 357 क्विंटल धान लेकर पहुंचे।
अनाज मंडी में पीआर धान की खरीद को लेकर शुक्रवार केे पांचवां दिन था लेकिन खरीद एजेंसियों द्वारा धान में नमी की मात्रा को अधिक बताते हुए खरीद नहीं की जा रही। जिससे मंडी शेड के नीचे धान के ढेर लगने शुरू हो गए है और जगह कम पड़ने लगी है।
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नमी की मात्रा अधिक होने के चलते 5 दिनों से नहीं हुई खरीद
शुक्रवार को पीआर की खरीद का 5वां दिन रहा। खरीद एजेंसियों द्वारा नमी की मात्रा अधिक होने पर खरीद नहीं की जा रही। पांच दिन में कुल 2160 क्विंटल धान सिरसा अनाज मंडी में पहुंचा, जिसमें से केवल 357 क्विंटल धान ही खरीदा गया है। एजेंसियों द्वारा खरीद करने से पहले धान की नमी जांची जाती है। नमी अगर 17 प्रतिशत से अधिक आती है तो धान की खरीद नहीं होगी।
एसोसिएशन ने की मॉस्चर मीटर की मांग
दी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान हरदीप सरकारिया ने कहा कि धान में नमी की मात्रा अधिक होने से खरीद नहीं हो पा रही है। नमी जांचने पर एजेंसी मीटर के परिणाम अन्य मीटरों से अधिक नमी बता रहे थे। गत वर्ष भी खरीद के दौरान एजेंसियों के मीटरों में खामियां पाई गई थी। उन्होंने कहा कि खरीद कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए मार्केट कमेटी एसोसिएशन को भी नमी जांच मीटर से जांच करने की अनुमति दें।
धान की खरीद ना होने से परेशान किसान प्राइवेट मिलर्स का कर रहे है रुख
परमल धान को सरकारी बोली पर बेचने की बजाए किसान सीधा मिलर्स को बेचने का प्रयास कर रहे हैं। किसान आत्माराम, सुधीर कुमार व प्रेम कुमार ने बताया कि वह बीते रविवार को वह मंडी में धान लेकर आए थे लेकिन नमी अधिक बताकर एजेंसी ने खरीद नहीं की। मंडी में बैठे पांच दिन हो गए है। अब देख रहे है कि अगर कोई प्राइवेट मिलर्स खरीदने के लिए राजी हो जाता है तो उसे नमी के अनुसार काट लगाकर धान बेच देंगे।
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मॉस्चर मीटर सरकार द्वारा जांच कर एजेंसी को दिया जाता है। जिससे धान के समय नमी जांचने के लिए प्रयोग किया जाता है। खरीद नमी के अनुसार ही होगी।
-प्रदीप कुमार, मैनेजर हैफेड

खरीद ना होने के चलते मंडी शेड के नीचे लगे पीआर धान के ढेर।- फोटो : Sirsa

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