सिरसा की अनाज मंडी के आसपास की सड़कों पर गेहूं की खरीद धड़ल्ले से हो रही है। दुकानों के आगे ढेरियां लगने से दुकानदार काफी परेशान हैं। हालांकि नियम के अनुसार कोई भी खरीद एजेंसी मंडी से बाहर गेहूं की खरीद नहीं कर सकती पर यहां एजेंसियां नियमों को ठेंगा दिखाते हुए सड़कों से गेहूं की खरीद कर रही हैं।
दुकानदार हर वर्ष इस मामले की शिकायत प्रशासन को करते हैं पर कोई कार्रवाई नहीं होती और दुकानदारों को एक माह तक मंदी की मार झेलनी पड़ती है। यही हाल धान के सीजन में होता है। इतना ही नहीं, अब तो गेहूं की खरीद कॉलोनियों में भी होने लगी है।
शहर के ए और सी ब्लॉक में भी गेहूं की खरीद की जा रही है। कॉलोनी वासियों को अपने घरों में आने-जाने के लिए रास्ता ही नहीं मिलता।
मंडी के बाहर खरीद करने पर प्रशासन ने किसी भी एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है, जिस कारण खरीद एजेंसियों की ओर से आढ़तियों के साथ मिलीभगत कर खरीद का काम जारी है। उधर, नेशनल हाईवे पर भी इस कारण यातायात जाम हो रहा है।
गेहूं का उठान नहीं होने से पूरी मंडी अनाज से अट गई है। मंडी में वाहनों का प्रवेश भी नहीं हो पाता। हालांकि सोमवार को एमडीओ रामकुमार बैनीवाल ने सिरसा की अनाज मंडी का निरीक्षण किया था और ठेकेदार को उठान कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए थे पर आज फिर वही हाल हो गया और मंडी से धीमी गति में उठान हो रहा है।
हर दिन उठान से कई गुणा ज्यादा आवक हो जाती है। आढ़तियों की ओर से मंडी से बाहर भी गेहूं की ढेरियां लगवाई जा रही है, जहां से खरीद एजेंसियां गेहूं खरीद रही हैं। मार्केट कमेटी के सचिव यशपाल मेहता व्यवस्था को सुचारु बनाने में जुटे हैं और वे संबंधित आढ़तियों और खरीद एजेंसियों को उचित निर्देश दे रहे हैं।
मंडी के प्रशासनिक अधिकारी और एसडीएम मनजीत सिंह भी सोमवार को मंडी में व्यवस्था को सुधारने के लिए पहुंचे थे पर उनके प्रयास सफल होते नहीं दिखे।
गेहूं से भरे ट्रक और ट्रॉलियों के कारण डबवाली रोड स्थित हाईवे पर भी जाम लग गया। गेहूं से भरे ट्रक, जो डबवाली रोड स्थित धर्मकांटे पर गेहूं का तोल कराने पहुंचे थे, इस कारण यहां लंबी लाइनें लग गई। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मशक्कत के बाद जाम खुलवाया।
अनाज मंडी से गेहूं लादकर ट्रक गोदामों में जाते हैं। ट्रक में भरे गेहूं का तोल डबवाली रोड पर अरोड़ वंश चौक स्थित धर्मकांटे पर होता है। मंगलवार सुबह से ही मंडी से गेहूं भरकर ट्रक उक्त धर्मकांटे पर पहुंचना शुरू हो गए थे। उधर, डबवाली की ओर से गेहूं की भरी ट्रालियां भी अनाज मंडी की ओर आ रही हैं।
ऐसे में धर्मकांटे के पास ट्रक और ट्रालियां सड़क के बीच आड़ी-तिरछी खड़ी होने से जाम लग गया। जाम एक-डेढ़ घंटे तक रहा। जाम के कारण हाईवे पर सांगवान चौक से एयरफोर्स स्टेशन तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। रोडवेज और निजी बसें भी जाम में फंसी रही, जिस कारण यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह से ट्रकों और ट्रालियों को साइड में कराकर जाम खुलवाया।
इसी प्रकार जनता भवन रोड पर भी अब जाम लगने लगा है क्योंकि एक तरफ की सड़क पर गेहूं की ढेरियां लग गई हैं। इस वजह से मंडी से गेहूं उठाने में ट्रक चालकों को दिक्कत हो रही है।
हालांकि मार्केट कमेटी की ओर से अनाज मंडी में पीली लाइन खींची गई थी और कहा गया था कि इस बार रास्तों पर गेहूं की ढेरियां या बोरियां नहीं रखने दी जाएंगी लेकिन खरीद एजेंसियों व आढ़तियों ने एक नहीं मानी और अब ट्रक चालक सड़कों पर जाम की स्थिति पैदा करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं। पूरा शहर सीजन में परेशान हो जाता है।
आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान सुरेंद्र मिचनाबाद ने बताया कि प्रशासन उनकी एक नहीं सुन रहा है। सीजन में मंडी में व्यवस्था सुचारु बनी रहे, इसके लिए उन्होंने सुझाव दिए थे पर उन सुझावों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
तीन माह पूर्व ही उन्होंने कुछ सुझाव दिए थे ताकि सीजन आने तक उन पर काम हो सके और मंडी में व्यवस्था बनी रहे। मंडी के उच्च अधिकारियों को कई बार लिखित रूप में शिकायत भी कर चुके हैं पर कोई नहीं सुनता आढ़तियों की। अब उठान धीमी होने के कारण पूरी मंडी में अव्यवस्था बनी हुई है।
दुकानदारों को होती है परेशानी
मंडी में जगह होती है तब भी सड़कों पर गेहूं की खरीद होती है। हर वर्ष प्रशासन को शिकायत करते हैं पर आढ़तियों व खरीद एजेंसियों पर कोई नकेल नहीं कसी जाती, जिस कारण सड़कों पर धड़ल्ले से खरीद हो रही है। दुकान में एक माह तक ग्राहक की बात छोड़ो, दुकानदारों को भी आना मुश्किल हो जाता है।
किसानों की छह माह की मेहनत को सड़कों पर बर्बाद किया जाता है। दुकान में जाने के लिए वाहन गुजरने का रास्ता भी नहीं छोड़ते। दुकान से सामान लेना है तो सीजन के बीतने का इंतजार करना पड़ता है। ग्राहकों को दुकान तक पैदल आने के लिए भी रास्ता नहीं मिल पाता। दुकानदारों के अलावा ग्राहकों व किसानों को भी परेशानी होती है।
राजेंद्र कस्वां
गेहूं और धान के सीजन में एक-एक माह तक दुकानों में ग्राहकों का पहुंचना संभव नहीं रहता। काम बिलकुल मंदा हो जाता है। हर बार दुकानदार प्रशासन को शिकायत करते हैं कि गेहूं की खरीद सड़कों पर करवाई जाए पर कोई सुनता ही नहीं। जबकि मंडी से बाहर फसल की खरीदारी करने का नियम ही नहीं है।
कासीराम मिगलानी
सड़क पर ढेरी लगाने के बाद भी मामला थमता नहीं है। धीरे-धीरे दुकानों के दरवाजे तक ढेरियां लग जाती है और जिस ढेरी की खरीद हो जाए उसकी उठान नहीं होती। दुकानों में धूल आती है, जिससे सारा सामान खराब हो जाता है। प्रशासन दुकानदारों की समस्या पर कोई ध्यान नहीं देता।
मदनलाल
दुकानों के आगे ढेरी लगाने से रोकते हैं तो लेबर वाले लड़ाई पर उतर जाते हैं। दुकानों के आगे झरने लगने से धूल दुकानों में आती है। लोगाें को सांस की बीमारी होने लगी है। नियम के अनुसार कोई काम नहीं हो रहा। आढ़तियों के साथ मिलीभगत कर खरीद एजेंसियां मंडी से बाहर गेहूं की खरीद कर रही है पर कोई भी अधिकारी छापा मारकर कार्रवाई नहीं कर रहा।