गेहूं के सीजन के शुरू होने के साथ ही कालाबाजारी माफिया सक्रिय हो गया
है। हरियाणा का गेहूं जम्मू में सप्लाई किया जा रहा है। आढ़ती के भेष में
छिपा यह माफिया सरकारी खरीद एजेंसियों और प्रशासन की लचर व्यवस्था का
पुरजोर फायदा उठा रहा है।
समर्थन मूल्य से अधिक भाव देकर किसानों का गेहूं धड़ल्ले से खरीदा जा रहा है। नियम के मुताबिक किसान अपना गेहूं कहीं भी बेच सकता है। चाहे हरियाणा हो या पंजाब लेकिन आढ़ती ऐसा नहीं कर सकते। डबवाली में इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
आढ़ती भेष में छिपा माफिया सामने आया है, जिसने अनाज मंडी क्षेत्र में ही अपने गोदाम विकसित किए हुए हैं। यह माफिया समर्थन मूल्य 1400 रुपये से 50 रुपये अधिक देकर किसानों से गेहूं खरीदता है। गोदामों में ही गेहूं को ढेरी करवाता है। बिना नमी की जांच के गेहूं को 50-50 किलो के बैग में भरता है और फिर ट्रकों और ट्रालों में लोड करके जम्मू भेज दिया जाता है।
माफिया से जुड़े लोगों ने मार्केट कमेटी से आढ़ती का लाइसेंस जारी करवाया हुआ है। अनाज मंडी में इनकी दुकानें हैं, जिसकी आड़ लेकर गोरखधंधा जोर-शोर से चला रहे हैं। इससे मार्केट कमेटी डबवाली को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है।
चूंकि 1450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदने के लिए उसी गेहूं को माफिया जम्मू में 1680 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचता है। जम्मू तक गेहूं पहुंचाने का खर्च 120 रुपये प्रति क्विंटल अदा करता है। सीधे तौर पर माफिया प्रति क्विंटल 110 रुपये कमाता है। जम्मू तक गेहूं पहुंचाने के लिए माफिया को कोई खास मशक्कत नहीं करनी पड़ती, चूंकि इसके कागजात कुछ ही देर में तैयार हो जाते हैं।
मंगलवार को अनाज मंडी क्षेत्र में बने एक गोदाम से 500 बैग से भरा एक ट्राला गोदाम से निकला। इस दौरान ट्राला के चालक से संवाददाता ने पूछा कि यह माल किस एजेंसी का है। चालक ने बताया कि माल किसी एजेंसी का नहीं, यह तो जम्मू जाना है। उनके पास कागजात हैं। पंजाब से पंजाब तक सप्लाई करना है। जब चालक से पूछा कि यह क्षेत्र हरियाणा का है।
कागजात आपके पास पंजाब के हैं। चालक का जवाब था कि ‘वह कुछ नहीं जानता, गोदाम का मालिक ही बताएगा और ट्रक लेकर चला गया।’ इसके कुछ देर बार एक ट्राला और आया व उपरोक्त गोदाम से गेहूं भरने लगा।
नियम के मुताबिक मार्केट कमेटी से बिना अनुमति लिए आढ़ती अपनी निजी या फिर किसी अन्य जगह पर गेहूं का स्टॉक नहीं कर सकते। इस बार मार्केट कमेटी ने केवल पांच ऐसी जगहों को मंजूरी दी है, जहां गेहूं की ढेरियां लगाई जा सकती है।
माफिया के बने बड़े-बड़े गोदाम मार्केट कमेटी को नहीं दिख रहे हैं, जहां से बेधड़क होकर माफिया हरियाणा का गेहूं जम्मू भेजकर मोटा मुनाफा कमा रहा है।
किसान अपनी गेहूं को बेचने के लिए कहीं भी ले जा सकता है लेकिन ये अधिकार आढ़ती या किसी अन्य व्यक्ति के पास नहीं। हालांकि ब्रोकर गेहूं की सौदेबाजी करवा सकते हैं। केवल पांच आढ़तियों ने ही मार्केट कमेटी से गेहूं अनाज मंडी के बाहर ढेरी करने की अनुमति ली हुई है।
अन्य किसी के पास नहीं। ऐसे ट्रक-ट्रालों की जांच की जाएगी, जो गेहूं से लदे हुए शहर से बाहर जाने का प्रयास करेंगे। साथ में अनाधिकृत रूप से चल रहे गोदामों का पता लगाकर छापामारी की जाएगी।
-सुभाष अरोड़ा, सचिव, मार्केट कमेटी, डबवाली
हां, कुछ लोग गेहूं जम्मू भेज रहे हैं लेकिन कुछ कर्मचारी और अधिकारी इनसे मिले हुए हैं। जो इन पर कार्रवाई नहीं करते। ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
-प्रकाश चंद बंसल, अध्यक्ष, कच्चा आढ़ती एसोसिएशन, डबवाली