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ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर लघु सचिवालय पहुंचे किसान, लगाया पक्का मोर्चा

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उपायुक्त कार्यालय में लगाए गए पक्का मोर्चा में मौजूद किसान। - फोटो : Sirsa
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सिरसा। खराब फसल का मुआवजा, नहरी पानी की सप्लाई का समय बढ़ाने की मांग को लेकर हरियाणा किसान मंच ने शुक्रवार से उपायुक्त कार्यालय में पक्का मोर्चा लगाया दिया। सुबह से ही किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर लघु सचिवालय पहुंचे। वहीं किसानों के धरने को लेकर काफी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा। वहीं सुबह उपायुक्त अनीश यादव ने किसानों के साथ बैठक की। लेकिन किसान मांगों को पूरा करने पर अड़े रहे और पक्का मोर्चा लगा दिया। किसानों ने 150 सदस्यों की कमेटी बनाई है। जो अलग-अलग दिन धरनास्थल पर पहुंचेगी।
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शुक्रवार को पक्का मोर्चा की अध्यक्षता करते हुए हरियाणा किसान मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा कहा कि किसानों की लंबित मांगों को लेकर सरकार व प्रशासन को 25 जनवरी तक का अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन उन्होंने कोई सकारात्मक रवैया नहीं दिखाई। जिसको लेकर किसानों में भारी रोष है। फसलें बर्बाद होने के कारण किसानों को दोहरी समस्या से गुजरना पड़ रहा है। भारूखेड़ा ने कहा कि किसान आंदोलन की तरह उपायुक्त कार्यालय में भी पक्का मोर्चा लगाया गया है। भारूखेड़ा ने कहा की जब तक किसानों की मांगों को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे यहां से टस से मस नहीं होंगे। इस दौरान अगर प्रशासन ने किसानों के साथ कोई जोर जबरदस्ती की तो उसका भी जवाब दिया जाएगा। इस मौके पर उनके साथ सतपाल सिंह सिरसा, बलवंत सिंह प्रधान, गुरनाम सिंह प्रधान, लखा सिंह प्रधान, नैब सिंह मलड़ी उप प्रधान, गगनदीप सिंह, गुरमेल सिंह, बलजिंदर सिंह अलीकां सहित अन्य किसान उपस्थित रहे।
किसानों की प्रमुख मांगें
गुलाबी सूंडी से खराब हुई नरमे की फसल का मुआवजा दिया जाए व बकाया बीमा क्लेम की राशि भी दी जाए। नहरी पानी में कटौती करके नहरें महीने में सात दिन चलाई जा रही हैं, जबकि पहले 15 दिन नहरें चलती थी। किसानों के ट्यूबवेल के कनेक्शन जारी किए जाए। हाल ही में यूरिया खाद की कमी के कारण किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यूरिया उपलब्ध करवाई जाए। बुढ़ापा पेंशन में कटौती की जा रही है, जिन लोगों की पेंशन बंद की गई है, उसे पुन: बहाल किया जाए। आंगनबाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर, पीटीआई अध्यापकों की मांगों को पूरा किया जाए। पक्के खाल बनाने पर फव्वारा सिस्टम की शर्तों को हटाया जाए। बंद पड़े शैक्षणिक संस्थानों को खोला जाए।
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