धान के अवशेषों के बीच सुपर सीडर से गेहूं की बिजाई करते हुए किसान
- फोटो : Sirsa
सिरसा। डीजल की बढ़ती कीमतों ने कटाई व बिजाई को ओर मंहगा कर दिया है। जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। धान के अवशेषों को नष्ट करे बिना सुपर सीडर मशीन से बिजाई करने को लेकर कृषि विभाग किसानों को जागरूक कर रहा है। सुपर सीडर से होने वाली बिजाई का खर्च तो किसान पर उतना ही पड़ता है लेकिन समय की बचत होती है। साथ ही धान के अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता भी बढ़ती है।
धान की कटाई के बाद बचे हुए अवशेषों का प्रबंधन करना किसान के लिए चुनौती पूर्ण काम होता है। प्रबंधन के बिना गेहूं की बिजाई करना मुश्किल कार्य होता है। अवशेषों के निपटान के लिए किसान अवशेषों को आग लगाकर नष्ट करता है। जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति कम होती है और मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में कृषि विभाग द्वारा गेहूं बिजाई के लिए सुपर सीडर नामक मशीन का प्रयोग करने को लेकर किसानों को जागरूक कर रही है। यह मशीन धान के अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर साथ-साथ बिजाई करती है। सुपर सीडर मशीन से किसानों को बिजाई की आधुनिक तकनीक मिली है। किसान अब गेहूं की बिजाई सुपर सीडर से ही कर रहा है, जिससे अवशेषों के प्रबंधन के साथ साथ समय भी बच रहा है।
बढ़ती है जमीन की उपजाऊ शक्ति, समय व तेल की भी बचत
सुपर सीडर से धान के अवशेषों में भी गेहूं बिजाई की जाती है। सुपर सीडर 45 से 50 मिनटों में ही अवशेषों को मिट्टी में मिलाने के साथ ही बिजाई भी कर देता है। पुरानी तौर तरीकों से बिजाई करने के लिए जमीन को 3 से 4 बार जोतकर बिजाई के लिए तैयार करना पड़ता था। जिसमें करीब 3 से 4 घंटे का समय लगता था। धान के अवशेष मिट्टी में मिलने से जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और किसान को खाद का प्रयोग कम करना पड़ता है।
किसान धान के अवशेषों को ना जलाकर गेहूं की बिजाई सुपर सीडर से करें। जिससे धान अवशेष मिट्टी में मिल जाते हैं और भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ते हैं।
-सतवीर सिंह, एपीपीओ, सिरसा।