किसानों के साथ बातचीत करते हुए ड्यूटी मजिस्ट्रेट प्रदीप अहलावत।
- फोटो : Sirsa
चोपटा। खंड के गांव नहराना में गैस पाइपलाइन डालने के लिए किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिलने पर किसानों ने अपने खेतों से पाइपलाइन डालने आए जीएसपीएल गैस नेट लिमिटेड कंपनी के कर्मियों का विरोध किया। साथ ही उचित मुआवजा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। करीब 4 घंटे तक किसानों व प्रशासनिक अधिकारियों व कंपनी कर्मियों के बीच बातचीत चलती रही लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
इस दौरान नाथूसरी चोपटा के नायब तहसीलदार प्रदीप अहलावत को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया और थाना प्रभारी सत्यवान पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। लेकिन किसानों के भारी विरोध के चलते जीएसपीएल गैस नेट लिमिटेड कंपनी के कर्मियों को बिना पाइपलाइन डाले ही दूसरी बार वापस लौटना पड़ा। नहराना के किसान पूर्व सरपंच ताराचंद चूरणिया, धर्मपाल, बंसीलाल, ओमप्रकाश ने बताया कि कि मेहसाना से बठिंडा के लिए जीएसपीएल गैस नेट लिमिटेड कंपनी द्वारा गैस पाइप लाइन डाली जा रही है । इस दौरान उनके खेतों के बीच से गैस पाइपलाइन गुजरनी है। उन्होंने बताया कि करीब 1 वर्ष पहले कंपनी के कर्मचारियों ने उनके खेतों में खड़े आंवला, अमरूद, अनार, सफेदा आदि के पेड़-पौधे काटने के लिए मुआवजा देने की बात कही। उन्होंने उनके करीब 4 हजार पौधे काटे गए। जिनकी कीमत करीब ढाई करोड़ रुपये बनती है। कंपनी के कर्मियों ने कहा कि उन्हें उनका उचित मुआवजा दिया जाएगा और पाइप लाइन डालने का समय आया तो कंपनी कर्मियों ने उन्हें मात्र 13 लाख का चेक थमा दिया।
इस दौरान किसानों ने डीआरओ व उपायुक्त को उचित मुआवजा देने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, कृषि मंत्री, मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार को भी पत्र लिखा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद उन्होंने उचित मुआवजा लेने के लिए न्यायालय का सहारा लिया। न्यायालय में भी केस विचाराधीन है।
वर्जन
किसानों की बात उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दी जाएगी और एक कमेटी बनाने का अनुरोध किया जाएगा। कमेटी जो फैसला लेगी वह दोनों पक्षों को मानना पड़ेगा।
- प्रदीप अहलावत, नायब तहसीलदार, ड्यूटी मजिस्ट्रेट।