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देश को उपप्रधानमंत्री और दो मुख्यमंत्री देने वाला विद्यालय गुरुजनों को तरसा

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 देश को उपप्रधानमंत्री व हरियाणा और पंजाब को मुख्यमंत्री देने वाला राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खुद गुरुओं के लिए तरस रहा है। इस वजह से यहां पर होनहारों की पढ़ाई प्रभावित होती है। एक शताब्दी पहले बना यह विद्यालय हरियाणा सरकार के आदर्श विद्यालयों की श्रेणी में आता है।
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सब्जी मंडी के नजदीक बने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की स्थापना साल 1914 में हुई थी। इस विद्यालय ने देश को देवीलाल के रूप में उपप्रधानमंत्री, ओमप्रकाश चौटाला और प्रकाश सिंह बादल के रूप में मुख्यमंत्री दिए। सरकार की लापरवाही के चलते विद्यालय में गुरुओं का अकाल पड़ा है। प्रिंसिपल कई बार अध्यापकों की मांग कर चुके हैं, लेकिन शिक्षा विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। खंड शिक्षा अधिकारी भी स्वीकारते हैं कि विद्यालय में शिक्षकों की कमी है। प्रिंसिपल की मांग को वे उच्च अधिकारियों के पास भेज चुके हैं, लेकिन शिक्षक कब आएंगे पता नहीं।

80 बच्चों पर एक अध्यापक
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में छठीं से बारहवीं तक शिक्षा प्राप्त करने आने वाले बच्चों की संख्या 1369 है, जिसमें छठीं से आठवीं तक 511, नौवीं-दसवीं में 291 और ग्यारहवीं से बारहवीं में 567 बच्चे हैं। छठीं से दसवीं तक के 802 बच्चों को पढ़ाने के लिए विद्यालय में महज 10 अध्यापक हैं। ऐसे में 80 बच्चों पर एक शिक्षक कार्यरत है। हरियाणा सरकार के आदर्श स्कूल में फैली अव्यवस्था यहीं आकर खत्म नहीं हो जाती। विज्ञान अध्यापक न होने के कारण अर्थशास्त्र के प्रवक्ता बच्चों को विज्ञान पढ़ा रहे हैं। यहीं नहीं गणित, हिंदी और पंजाबी अध्यापक का एक-एक पद रिक्त होने पर अध्यापकों पर अनावश्यक बोझ पड़ रहा है।
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कई विषयों के जूनियर लेक्चरर ही नहीं
इस आदर्श स्कूल की ग्यारहवीं तथा बारहवीं जमात में पढ़ने वालों की संख्या 567 है जबकि अध्यापकों की संख्या मात्र 16  हैं। राजनीतिक शास्त्र, इतिहास, सामाजिक शास्त्र, कॉमर्स, कंप्यूटर प्रवक्ता, हिंदी, पंजाबी, अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान के पद खाली पड़े हैं। ऐसे में उपरोक्त प्रवक्ताओं को तय कक्षाओं के अतिरिक्त ज्यादा कक्षाएं लेनी पड़ रही हैं।

कमरे कम, पेड़ों के नीचे पढ़ाई
गुणवत्तापूर्वक शिक्षा देने के लिए हरियाणा सरकार ने शिक्षा नीति बनाई हुई है। शिक्षा नीति के अनुसार 40 बच्चों पर एक शिक्षक कार्यरत होना चाहिए, लेकिन सरकार की आदर्श विद्यालयों की सूची वाले इस विद्यालय में उक्त हाल के बाद कमरों की स्थिति भी अच्छी नहीं है। शिक्षा नीति के अनुसार विद्यालय में बच्चों की संख्या के अनुसार 34 कमरों का होना जरूरी है, लेकिन मौजूदा हालत में मात्र 21 कमरे हैं। इस हालत में बच्चे बरामदों और पेड़ों के नीचे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
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छठीं से दसवीं तक अध्यापकों की स्थिति
सामाजिक शास्त्र        4
गणित                1
हिंदी                1
पंजाबी/संस्कृत        2
डीपीई            1
ड्राईंग                1

11वीं से 12वीं तक अध्यापकों की स्थिति
अंग्रेजी        4
कॉमर्स        4
हिंदी            3
फिजिकल        1
इतिहास        1
अर्थशास्त्र        1
जीव विज्ञान        1
रसायन विज्ञान    1

कोट
अध्यापकों की कमी के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार शिक्षकों की मांग कर चुका हूं, लेकिन कमी पूरी नहीं हो पा रही।
- सुरजीत सिंह मान, प्रिंसिपल, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, डबवाली

 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी है। प्रिंसिपल जितनी दफा भी मांग पत्र लेकर आए हैं, उसे उच्च अधिकारियों के पास भेज दिया गया है।
-संत कुमार, बीईओ, डबवाली
 
विद्यालय में अध्यापकों की कमी के संबंध में आज तक उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। सूचना मिलने पर वे आगामी कार्रवाई के लिए सरकार के पास भेजेंगे।
- सतीश कुमार, एसडीएम, डबवाली


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