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भारतमाला प्रोजेक्ट का विरोध: डबवाली के किसानों ने राजस्थान में रुकवाया काम, खड़ी फसल नष्ट करने के विरोध में धरना

Thu, 26 Aug 2021 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा)

सार

2019 से बन रहे 1256 किलोमीटर के इस 6 लाइन हाइवे के बन जाने के बाद जामनगर से अमृतसर का 26 घंटे का सफर घटकर मात्र 13 घंटे का रह जाएगा। किसानों ने आरोप लगाया कि उनकी जमीन को जबरदस्ती अधिग्रहण किया जा रहा है।
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भारतमाला-अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे परियोजना के विरोध में किसान लामबंद - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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राजस्थान के संगरिया में एनएचएआई द्वारा किसानों की खड़ी फसलें नष्ट करने के विरोध में डबवाली के नौ गांव के किसानों ने गांव शेरगढ़ में धरना दिया। किसानों ने राजस्थान सरकार और एनएचएआई अधिकारियों के खिलाफ रोष प्रकट करते हुए भारतमाला प्रोजेक्ट का काम रुकवा दिया।

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बुधवार को कामरेड राकेश फगोड़िया व दया राम उलानिया ने बताया कि जामनगर-अमृतसर तक हाईवे निकालने के लिए एनएचएआई की ओर से पुलिस प्रशासन की सहायता लेकर कब्जा लिया जा रहा है। किसानों की खड़ी फसल पर जेसीबी चलाकर नष्ट किया जा रहा है। जिसके कारण किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। पिछले 3 दिन से राजस्थान के संगरिया में भी प्रशासन की ओर से यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है।


इसकी सूचना मिलने के बाद डबवाली के नौ गांवों के किसान ट्रैक्टरों पर सवार होकर मौके पर पहुंच गए और विरोध करना शुरू कर दिया। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने सिरसा के दो किसान नेताओं पर शांति भंग करने का नोटिस भी जारी किया है और धरना स्थल पर कार्य बंद कर कुछ दूरी पर कार्य शुरू कर दिया है। इस मौके पर गांव अबूब शहर से निशांत भादू, मोहनलाल भादू, इंदर सिंह, गांव डबवाली से नंबरदार शिव चरण सिंह, गांव जोगीवाला से कमल जगतार अलिकां, सरपंच बलकरण सिंह, छोटू राम कड़वासरा किसान उपस्थित रहे।
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यह है मुख्य मांग
2019 से बन रहे 1256 किलोमीटर के इस 6 लाइन हाइवे के बन जाने के बाद जामनगर से अमृतसर का 26 घंटे का सफर घटकर मात्र 13 घंटे का रह जाएगा। किसानों ने आरोप लगाया कि उनकी जमीन को जबरदस्ती अधिग्रहण किया जा रहा है। किसानों के अनुसार उनको मार्केट रेट 15 लाख के बजाय सिर्फ तीन लाख रुपये मुआवजा दिया जा रहा है। वे इसका विरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी खड़ी फसल को रौंदा जा रहा है। अब किसानों ने प्रशासन से सिर्फ एक महीने की मोहलत मांगी है, ताकि उनकी फसल को नुकसान न हो। किसानों ने बताया कि काम के दौरान नहरी पानी के खाल, रास्तों को भी तोड़ दिया गया है। किसानों के अनुसार न तो उनको मुआवजा मिला है और न ही फसल से कोई उम्मीद है। सरकार किसान परिवारों की भूखे मरने की नौबत पैदा कर दी है। 

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