साइकिल मेला : 4500 रुपये से कम की साइकिल ही नहीं बनती तो कहां से लाए
अभिभावकों बोले, पिछले तीन सालों की साइकिलें आज तक नहीं आई, विभाग कर रहा खानापूर्ति
विभाग खंड स्तर पर स्कूलों में ही पहुंचाए साइकिलें
दूसरे दिन आए 11वीं कक्षा के विद्यार्थी, जिद्द करने पर अभिभावकों ने भरा फार्म
स्टॉल संचालक बोले : किसी कंपनी ने 4500 रुपये से कम कीमत की साइकिल नहीं बनाई तो हम कहां से लाए
सिरसा। शिक्षा विभाग की ओर से लगाया गया साइकिल मेला विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों के लिए परेशानी का कारण बना है। कारण है साइकिलों के अत्यधिक दाम। दरअसल सरकार ने 3300 तक साइकिल के दाम निर्धारित किए है और मेले में आई कंपनियों की साइकिलों की शुरूआत ही 4500 रुपये से हो रही है। ऐसे में स्थिति स्पष्ट है कि नाम रहेगा सरकार की ओर से साइकिल दी गई और अभिभावकों को जेबें करनी पडे़ंगी ढीली। इसे लेकर अभिभावक चिंतित है। वहीं स्टॉल लगाने वाले कर्मचारियों का कहना है कि 4500 से कम दाम में कोई कंपनी साइकिल बनाती ही नहीं तो हम कहां से लाए।
शिक्षा विभाग की ओर से सरकारी विद्यालयों में पढ़ रहे अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए साइकिल मेला लगाया गया है। मेले के दूसरे दिन साइकिल पसंद करने के लिए 11वीं कक्षा के विद्यार्थी पहुंचे। विभाग ने साइकिल के लिए जो कीमत निर्धारित की है। उस कीमत की एक भी साइकिल न होने के कारण अभिभावकों ने रोष जताया। इसके बाद विद्यार्थियों के जिद्द के बाद अभिभावकों ने साइकिल खरीदने के लिए फार्म भरवाया।
शुक्रवार को साइकिल मेले का दूसरा दिन रहा। जिसमें 7 खंडों के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी साइकिल पसंद करने के लिए पहुंचे। जिनके साथ अभिभावक भी मौजूद रहे। अभिभावकों ने कहा कि जो भी यहां साइकिल पसंद करने के लिए आए है। वो सभी गरीब परिवारों से है। कोई भी संपन्न घरों से नहीं है। लेकिन सरकार द्वारा विद्यार्थियों को साइकिल देने का दिखावा किया जा रहा है। वहीं मेला इतनी दूर लगाया गया है कि आने-जाने का किराया भी मुश्किल से जुटा पाए हैं। मेले के दूसरे दिन 11वीं कक्षा के विद्यार्थी साइकिल पसंद करने के लिए आए। कीमत ज्यादा होने के कारण अभिभावकों ने साइकिल लेने से मना कर दिया। लेकिन विद्यार्थियों के जिद्द करने के बाद कुछ अभिभावकों ने फार्म भरें।
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पिछले साल की अब तक नहीं आई साइकिलें
अभिभावक कालू राम, रामचंद्र, संतरो देवी, कौशल्या ने कहा कि सरकार की ओर से हर साल साइकिल मेला लगाया जाता है। लेकिन साइकिलों के लिए जारी किए गए पैसे सालों तक नहीं आते हैं। अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चे आज 11वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। लेकिन उनके बच्चों की अभी तक 8वीं की साइकिलें नहीं आई है। तीन साल से विद्यालय टाल मटोल ही की जा रही है। लेकिन कोई भी सही से जवाब नहीं दे रहा है।
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खंडों में मेला लगाने की अभिभावकों ने की मांग
मेले में विद्यार्थियों के साथ आए अभिभावकों ने बताया कि वह दूर-दूर से आए हैं। उनके पास कोई साधन नहीं है। विभाग को चाहिए कि वह उनके खंडों में ही मेला लगाएं। वहीं कई अभिभावकों का कहना है कि मेला लगाकर खानापूर्ति न करें। अगर सरकार को गरीब बच्चों को साइकिलें देेनी ही है तो जिन स्कूलों में विद्यार्थी पढ़ रहे है। उन्हीं स्कूलों में साइकिलें पहुंचा दें।
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वर्जन
शुक्रवार को कुल 1490 विद्यार्थियों ने साइकिलों को पसंद किया है। 2021-22 में जो साइकिल मेला लगाया गया। उन विद्यार्थियों का बजट मार्च तक जारी कर दिया जाएगा। लेकिन अभिभावक पिछले तीन साल का बोल रहे है। पिछले दो सालों में तो स्कूल लगे ही नहीं। जिनके कारण सरकार की ओर से बजट जारी नहीं किया गया।
- अनिल कुमार, असिस्टेंट एजूकेशन ऑफिसर
शिक्षा विभाग सिरसा।