धार्मिक नगरी सिरसा के लोग गोभक्त है। यहीं वजह है कि प्रदेश में सबसे ज्यादा 90 गोशालाएं सिरसा जिले में हैं जिनमे 45 हजार गोधन का पालन पोषण हो रहा है। पर सच्चाई यह भी है कि प्रदेश में सबसे ज्यादा बेसहारा गोधन भी सिरसा में ही हैं। सभी गोशालाएं गोभक्तों और किसानों की ओर से दिए जा रहे दान के सहारे चल रही हैं और सरकारी अनुदान ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। उधर बेसहारा पशुओं के चलते सिरसा में डेढ़ साल में हुए हादसों में करीब 60 लोगों की जानें जा चुकी है जो प्रदेश में सर्वाधिक है। वहीं गोधन को लेकर हुई घोषणाएं कागजों में ही सीमित है।
आजकल देश में गो तस्करों और गोभक्तों को लेकर चर्चा जोरों पर है। गाय के नाम पर सेवा कम और राजनीति ज्यादा की जा रही है। गोधन आज भी सड़कों पर बेसहारा घूम रहा है। पालीथिन खाकर अकाल मौत का ग्रास बन रहा है। प्रदेश में करीब 400 गोशालाएं है जिसमें से सर्वाधिक 90 गोशालाएं सिरसा जिले में है। 86 गोशालाएं पूरी तरह से कार्य कर रही है जबकि चार निर्माणाधीन है। धार्मिक नगरी सिरसा के लोग काफी धार्मिक है और परम गोभक्त हैं। जहां पर हर कार्य श्ुारू णकरने से पहले गो सेवा के नाम पर धन निकाला जाता है।
हर दुकानदार प्रतिदिन गोशाला के लिए दान निकालता है। लोग हरा चारा गोशाला तक पहुंचाते हैं या गायों के लिए चारा सड़कों के किनारे डाल दिया जाता है। सिरसा नगर में जिले की सबसे बड़ी दो गोशालाएं है। गोशाला रोड स्थित गोशाला में करीब तीन हजार, चौ. देवीलाल गोशाला खाजाखेड़ा में 2500 गायें हैं। हरियाणा गोशाला संघ सिरसा के कार्यकारी प्रधान रमेश मेहता ने बताया कि श्री गोशाला के पास अपनी भूमि है जहां पर हरा चारा उगाया जाता है साथ ही नगर के ज्यादातर लोग प्रतिदिन इसी गोशाला में गायों की सेवा करने जाते हैं और हरा चारा, तूड़ी, गुड़, खल बिनौला आदि पहुंचाते है।
यह गोशाला गायों का दूध भी बेचती है और उसकी आय भी गोशाला में लगाई जाती है। चौ. देवीलाल गोशाला खाजाखेड़ा की दशा दो साल पहले तक दयनीय हो गई थी लेकिन आज अच्छी स्थिति में है और गोवंश की संख्या करीब 2500 हैं। इसके साथ ही जमाल गोशाला में एक हजार, माधोसिंघाना में 1200, डिंगमंडी में एक हजार, नाथुसरी चोपटा में 1200, ऐलनाबाद पुरानी गोशाला में 12000, रानियां में 1500, काअलांवाली में एक हजार, ओढां में 800, पन्नीवालामोटा में 600, डबवाली में 1200 गोधन है।
कहां से आता है गोशाला में धन
जिले की सभी गोशालाएं दान पर निर्भर है। किसान गेहूं के सीजन में तूड़ी गोशालाओं को दान करते है जिसे सालभर के लिए तूड़ी जमा हो जाती है। हरा चारा या तो लोग प्रतिदिन दान करते है या गोशाला को खरीदना पड़ता है। नगर के दानी लोग एक दिन के हरे चारे का खर्च स्वयं वहन करते है और वाकायदा उनका नाम सूचना पट पर लिखा जाता है कि आज हरे चारे की व्यवस्था अमुख व्यक्ति की ओर से की गई है। आढ़तियों की ओर से आय का कुछ प्रतिशत धन गोशाला में दिया जाता है। गोशाला संघ के प्रधान योगेंद्र बिश्नोई और कार्यकारी प्रधान रमेश मेहता का कहना है कि पंजीकृत गोशालों को प्रतिवर्ष एक लाख रुपये की राशि ही उपलब्ध करवाई जाती है इतनी राशि में गोशाला की देखभाल नहीं हो सकती। रमेश मेहता ने बताया कि अदालत प्रति पशु प्रति दिन 15 रुपये के हिसाब से गोशाला को देने का आदेश दे चुकी है मगर इस पर कोई अमल नहंी किया जा रहा है।
पंद्रह हजार लावारिस पशु सड़कों पर
सिरसा जिले में पंद्रह हजार बेसहारा पशु सड़कों पर घूम रहा है जिसमें सर्वाधिक संख्या सांड़ों की है। जिनके कारण आए दिन हादसे होते रहते है। डेढ़ साल में जिले में 60 लोगों की मौत हो चुकी है। शासन और प्रशासन नंदीशाला बनाने की बात करते है पर उस पर अमल नहंी होता। रमेश मेहता ने बताया कि भंभूर, मंगाला, अली मोहम्मद, बेगू में बेसहारा पशुओं की संख्या सबसे ज्यादा है। इन क्षेत्रों में गोशालाएं कम हैं। कांग्रेस नेता होशियारी लाल शर्मा और इनेलो नेता पदम जैन का कहना है कि सरकार को पंचायती भूमि का चयनकर नंदीशाला का निर्माण करना चाहिए ताकि लोग हादसों का शिकार न हो सके। रमेश मेहता का कहना है कि सांड़ों को इसलिए गोशाला में नहीं रखा जाता है क्योंकि वे उत्पात ज्यादा मचाते है और नुकसान भी ज्यादा होता है। इनके लिए नंदीशाला ही उपयुक्त स्थान हैं।
आपरेशन के लिए जाना पड़ता है हिसार
कार्यकारी प्रधान रमेश मेहता ने बताया कि दस-दस गोशालाओं पर एक वीएनडीए नियुक्त किया गया है जबकि पशु चिकित्सक नहीं है। उन्होंने बताया कि हर किसी पशु का पैर टूट जाए और ऑपरेशन कराना पडे़ तो पशु को हिसार ले जाना होगा क्योंकि सिरसा में करोड़ों की लागत से बना पॉली क्लीनिक नाम का ही है जहां पर न दवाएं है और न ही मशीनें। सरकार को इस दिशा में भी कदम उठाना चाहिए।
गोसेवा आयोग उठाएगा उचित कदम
संघ के कार्यकारी जिला प्रधान रमेश मेहता ने बताया कि हरियाणा गो सेवा आयोग के अध्यक्ष ने पिछले दिनों फूलकां गांव मे आयोजित एक समारोह मे कहा था कि गोशालाओं को फंड जारी किया जाएगा और गो तस्करी रोकने के लिए जिलास्तर पर कमेटी का गठन किया जाएगा और गोभक्तों को परिचय पत्र बनाकर दिए जाएंगे ताकि कथित गो रक्षकों पर अंकुश लगाया जा सके।