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मार्च में होगा स्वच्छता सर्वेक्षण, 200 कर्मचारियों से कैसे हो शहर की सफाई

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शहर में सफाई करते हुए नगरपरिषद सफाई कर्मचारी। - फोटो : Sirsa
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सिरसा। स्वच्छता सर्वेक्षण इस बार मार्च में होगा। इसके लिए सरकार ने शेडयूल बना लिया है। 1 से 31 मार्च के बीच कभी भी स्वच्छता सर्वेक्षण की टीमें दस्तक दे सकती है। साथ ही आवेदन करने के लिए नगर पालिकाओं व नगर परिषद को पांच दिन का अतिरिक्त समय मिल गया है। सिटीजन फीडबैक पर जोर देने के लिए इस बार नगर परिषद ने जागरूकता अभियान चलाया है ताकि रैंकिंग में सुधार हो सके। लेकिन शहर में सफाई कर्मी करीब 200 हैं जबकि जरूरत 500 की है।
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सरकार की ओर से हर वर्ष सभी नगर परिषद व नगर पालिका क्षेत्रों का स्वच्छता सर्वेक्षण करवाया जाता है। स्वच्छता रैंकिंग अनुसार बजट मिलता है और पता चलता है कि किस क्षेत्र में कितनी सफाई है। इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण 1 से 31 मार्च के बीच होगा। इससे पहले सभी नगर परिषदों को आवेदन करना है। इसका समय पहले 20 फरवरी तक निर्धारित था। लेकिन अब अतिरिक्त समय देकर यह अवधि बढ़ाकर 25 फरवरी तक कर दी है। इसके बाद सर्वेक्षण के लिए टीमें फील्ड में उतरेंगी।
सार्वजनिक शौचालयों को लेकर जारी किए निर्देश
शहर में बीस से ज्यादा सार्वजनिक शौचालय हैं। कई शौचालय ठेके पर दिए हैं, जबकि कई ऐसे शौचालय है जिन्हें नगर परिषद स्वयं देख रही है। ऐसे में स्वच्छता सर्वेक्षण की टीमें सार्वजनिक शौचालय भी देखेगी। इसके लिए नप अधिकारियों ने शौचालयों की स्थित सुधारने के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं। आंबेडकर चौक, टाउन पार्क, ट्रेड टावर मार्केट के शौचालयों की हालत अभी भी खराब है। जबकि हुडा मार्केट के सार्वजनिक शौचालय पर तो हर समय ताला ही लटका रहता है। ऐसे में यदि स्वच्छता सर्वेक्षण टीम देखेगी तो नंबर कटेंगे।
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गीला, सूखा कचरा अलग रखने के लिए चला अभियान, 15 सक्षम टीमें गठित
आमजन को नगर परिषद की ओर से जागरूक किया जा रहा है कि गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखें। इसके लिए सक्षम युवाओं की टीम गठित की गई है। करीब 15 से ज्यादा टीमें तैयार करके उन्हें वार्डों में भेजा जा रहा है। प्रत्येक वार्ड में जाकर सक्षम युवा डोर टू डोर जनसंपर्क करते हैं और बताते हैं कि गीला, सूखा कड़ा अलग-अलग एकत्र करें। इसके अलावा घर में ही गीले कूड़े से खाद बनाने के लिए भी आमजन को जागरूक किया जा रहा है, ताकि गीला कचरा बाहर आए ही न और खाद भी तैयार हो जाए। सक्षम युवाओं की टीमें 18 वार्डों में डोर टू डोर सर्वे का काम पूरा कर चुकी है। अब 13 वार्डों में यह काम चल रहा है।
इन कारणों पर करना होगा मंथन
- नगर परिषद में सफाई कर्मचारियों का अभाव है
- शहर के निकलने वाले कूड़ा को अलग-अलग नहीं किया जा रहा।
- शहरी क्षेत्र में कूड़ा सड़कों पर बिखरा हुआ मिलता है।
- बाजारों की नियमित सफाई नहीं हो पाती।
- कचरे का निस्तारीकरण नियम अनुसार नहीं हो पा रहा।
- सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति खराब है।
- डंपिंग प्वाइंट के बाहर भी कूड़ा बिखरा रहता है और बेसहारा पशु उसमें मुंह मारते हैं।
सफाई कर्मचारियों की कमी आ रही आड़े
नगर परिषद के पास सफाई कर्मचारियों की कमी है। शहर की आबादी के अनुसार कम से कम 500 कर्मचारी चाहिए। लेकिन इस समय नगर परिषद के पास केवल 200 के आसपास कर्मचारी है। इनमें भी करीब 60 कर्मचारी वीआईपी ड्यूटी में रहते हैं। ऐसे में शहर की सभी कॉलोनियों में प्रतिदिन एक साथ सफाई नहीं हो सकती। रोटेशन अनुसार सफाई की जाती है। ऐसे में जब कोई शिकायत आ जाए तो वहां विशेष सफाई अभियान चलाकर काम किया जाता है। स्वच्छता रैंकिंग गिरने का बड़ा कारण इसे माना जाता है। इसके अलावा कूड़ा उठान को लेकर भी समस्या होती है। नगर परिषद का प्रयास है कि सभी स्थायी डंपिंग प्वाइंट खत्म कर दिए जाए और कूड़ा उठान के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियां उपलब्ध करवाई जाए, ताकि शहर में कूड़ा नजर ही न आए।
वर्ष अनुसार अब तक की रैंकिंग
शहर, वर्ष, 2018, 2019, 2020,2021
सिरसा, 291, 270, 176, 238
मंडी डबवाली, 318, 737, 65, 51
ऐलनाबाद, 130, 260, 71, 146
कालांवाली, 272, 481, 255, 547
रानियां, 110, 403, 120, 74
सर्वेक्षण को लेकर हमारी तैयारियां पूरी है: पवन
सर्वेक्षण के लिए मार्च में टीमें आएगी। इससे पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जहां एक ओर सार्वजनिक शौचालय को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं, वही दूसरी ओर शहर में सफाई व्यवस्था के लिए योजना बना रहे हैं। उम्मीद है कि इस बार जिले की रैंकिग सुधर कर आएगी। आमजन को जागरूक करने के लिए भी फील्ड में सक्षम युवाओं की टीम उतारी गई है।
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- पवन कंबोज, सफाई निरीक्षक, नगर परिषद सिरसा
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