सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय ने पहली बार एक नए सॉफ्टवेयर का प्रयोग परीक्षाओं के प्रश्नपत्र बनवाने में किया है। जो बेहद कारगर साबित हुआ है। इससे लाखों रुपये का खर्च विश्वविद्यालय प्रशासन का बचा है और प्रश्नपत्र बनाने में पारदर्शिता भी आई है। इसी सॉफ्टवेयर से प्राप्त प्रश्नपत्रों के आधार पर ही मौजूदा समय में वार्षिक परीक्षाएं संपन्न हो रही हैं।
विश्वविद्यालय के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब ऑनलाइन सिस्टम से प्राप्त प्रश्नपत्रों से परीक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है। वहीं भविष्य की बात करें तो आने वाले दिनों में परीक्षा केंद्रों पर भी ऑनलाइन प्रश्न पत्र भेजे जाएंगे। वहीं प्रिंट कर बच्चों को सौंप दिया जाएगा। संवाद
इस प्रकार करता है सॉफ्टवेयर काम
विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश या देश के जिस भी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर से किसी विषय का पेपर बनवाना होता है। उस प्रोफेसर को सॉफ्टवेयर ऑनलाइन उपलब्ध करवा दिया जाता है। सॉफ्टवेयर पर संबंधित प्रोफेसर की आईडी बना दी जाती है। प्रोफेसर जब भी सॉफ्टवेयर पर पेपर तैयार करने बैठेंगे तो उसका ओटीपी उनकी मेल आईडी पर आएगा। उसी ओटीपी से सॉफ्टवेयर काम करने के लिए खुलेगा। जब-जब प्रोफेसर प्रश्न पत्र बनाने के लिए सॉफ्टेवयर का प्रयोग करेंगा, विवि प्रशासन की संबंधित ब्रांच को उसकी जानकारी प्राप्त हो जाएगी। जब पेपर तैयार होने के बाद प्रोफेसर प्रश्न पत्र को सबमिट कर देंगे तो उसके बाद वो सॉफ्टवेयर का प्रयोग नहीं कर पाएंगे।
दो अधिकारियों के अलावा कोई नहीं देख सकता प्रश्न पत्र
विश्वविद्यालय के प्रोफेसर द्वारा बनाया गया प्रश्नपत्र सीडीएलयू की सीक्रेसी और कंडक्ट ब्रांच के पास पहुंचता है। इन प्रश्नपत्रों को तभी ओपन किया जा सकता है, जो मुख्य अधिकारी एक साथ अपने मोबाइल का ओटीपी देंगे। अकेला कोई भी अधिकारी इन प्रश्नपत्रों को देख नहीं सकता है। जिससे प्रश्नपत्रों के लीक होने का शत प्रतिशत खतरा खत्म हो गया है।
क्यों जरूरी था सॉफ्टवेयर
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार अलग अलग विषय का प्रश्न पत्र अलग अलग राज्यों के प्रोफेसरों से तैयार करवाया जाता है। इन प्रश्नपत्रों को लेकर आने में बड़े स्तर पर पैसा खर्च होता है। स्पेशल गाड़ी व कर्मचारी प्रश्न पत्र लेने के लिए जाते हैं। यह बेहद खर्चीला सिस्टम है। इस खर्च को सॉफ्टवेयर ने पूरी तरह से खत्म कर दिया है। कर्मचारी के लेकर आने के बाद उन्हें कई दिनों तक संभाल कर रखना बड़ी चुनौती होती थी। इस दौरान कई बार प्रश्नपत्र के लीक होने का खतरा बना रहता था। इस सॉफ्टवेयर से प्रश्नपत्र के लीक का खतरा पूरी तरह से खत्म हो गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रश्नपत्र बनवाने के लिए पहली बार नए सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया गया है। जो बेहद कारगर साबित हुआ है।
-शैलेंद्र हुड्डा, परीक्षा नियंत्रक, सीडीएलयू