हरियाणा के सिरसा में सांसद सुनीता दुग्गल का टिकट काटते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सिरसा लोकसभा सीट से डॉ. अशोक तंवर को प्रत्याशी बनाया है। 52 दिन पहले आम आदमी पार्टी को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए तंवर के टिकट मिलने का बड़ा कारण क्षेत्र में उनकी सक्रियता और अनुसूचित जाति का बड़ा चेहरा होना है। इसके अलावा तंवर का जुझारूपन और हार के बावजूद सिरसा क्षेत्र में सक्रिय बना रहना भी टिकट का आधार माना जा रहा है।
सांसद सुनीता का टिकट कटने का कारण
दुग्गल का प्लस प्वाइंट
डाॅ. अशोक तंवर का सियासी सफरनामा
डाॅ. अशोक तंवर हरियाणा की सियासत के प्रमुख किरदारों में शुमार हैं। संगठन एवं चुनाव प्रबंधन का लंबा अनुभव है। वे कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में कई अहम पदों पर काम कर चुके हैं। 2009 में सिरसा से सांसद रह चुके डाॅ. अशोक तंवर सिरसा लोकसभा से तीन चुनाव लड़ चुके हैं। वे युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अलावा हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे हरियाणा की कई सीटों पर प्रभाव रखते हैं। एक असरकारक और ऊर्जावान नेता हैं। युवाओं सहित सभी वर्गों में उनकी प्रभावी पैठ है। विशेष बात यह है कि वे 24 घंटे में से 16 घंटे तक सक्रिय रहते हैं।
तंवर का प्रोफाइल
डॉ. अशोक तंवर का जन्म 12 फरवरी 1976 को झज्जर के गांव चिमनी में हुआ। डाॅ. तंवर के पिता भारतीय सेना में रहे हैं। एक साधारण परिवार में जन्मे डाॅ. तंवर शुरू से ही काबिल व मेहनती रहे हैं। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से इतिहास में एमए, एमफिल और पीएचडी की डिग्री हासिल की। साल 1999 में उन्हें एनएसयूआई का सचिव और साल 2003 में प्रधान बनाया गया। 29 बरस की आयु में वे युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने और इसके बाद युवा कांग्रेस ने देश की सियासत में एक नया आयाम स्थापित किया। उन्होंने युवाओं को राजनीति से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किए। 2009 में कांग्रेस ने सिरसा से उम्मीदवार बनाया था। तब इन्होंने चौटाला के गढ़ में इनेलो के डाॅ. सीताराम को 35001 वोटों से हरा दिया था। इसके बाद डाॅ. तंवर ने सिरसा को अपनी कर्मभूमि बनाया। सिरसा में ही अपना घर बना लिया। कांग्रेस हाईकमान ने फरवरी 2014 में डाॅ. तंवर को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया। करीब दो दशक तक कांग्रेस की सियासत में सक्रिय रहने के बाद 5 अक्तूबर 2019 को उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया।
वर्ष 2019 के आंकड़ों के अुनसार सिरसा में जातिगत स्थिति
सिरसा से अब तक जीते सांसद