गांव चौटाला में पैक्स के गेट पर धरना देते हुए किसान।
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गोरीवाला। चौटाला गांव के पैक्स में दो माह बाद गत दिवस 1160 बैग यूरिया खाद के आए। खाद आने की सूचना मिलते ही किसान बड़ी संख्या में पैक्स में एकत्रित होने शुरू हो गए। भारुखेड़ा के 25 किसान सुबह सबसे पहले आकर लाइन में लगे हुए थे। दसवें नंबर पर किसान बलवंत राम से लेकर 34 वें नंबर किसान निरंजन तक भारूखेड़ा के किसान थे। किसान बलवंत ने बताया कि उसका नंबर आया तो पैक्स के कर्मचारियों ने लंच टाइम का हवाला देकर खाद का वितरण बंद कर दिया। आरोप है कि पिछले गेट से प्रभावशाली लोगों की पर्चियां काटी गई जिसमें से कुछ पड़ोसी राज्य राजस्थान के भी लोग थे। पिछले गेट से खाद निकालने के बाद मात्र सौ बैग स्टॉक में खाद बची। जब किसानों ने कहा की मात्र 10 लोगों में हजार बैग कैसे बंट गए। कर्मचारियों ने कहा कि भारूखेड़ा गांव के किसानों को यहां खाद नहीं मिलेगी।
आक्रोशित किसानों ने उपायुक्त से की शिकायत
आक्रोशित किसानों ने सोसायटी के गेट पर बैठकर पैक्स का घेराव कर लिया। किसान राकेश फगोड़िया, नत्थूराम भारुखेड़ा, राजपाल, विजय, राय सिंह, रमन, बलवंत, निरंजन ने उपायुक्त सिरसा अनीश यादव से दूरभाष पर संपर्क कर कर्मचारियों द्वारा की गई गड़बड़ की शिकायत की। जिसके बाद उपखंड अधिकारी डबवाली राजेश पूनिया, तहसीलदार भुवनेश कुमार ने किसानों को फोन पर आश्वस्त किया कि आपको खाद उपलब्ध करवाई जाएगी। भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। लेकिन किसानों ने कोई लिखित शिकायत नहीं दी और स्पष्ट कहा कि जब तक खाद नहीं मिलेगी तब तक धरने से नहीं उठेंगे। एसडीओ ने फोन पर कहा कि डेढ़ सौ बैग खाद के गांव में पहुंच जाएंगे। इसके बाद ग्रामीणों ने पैक्स के कर्मचारियों को खाद के रुपये जमा करवाएं।
रात्रि 10 बजे पहुंचे डेढ़ सौ बैग यूरिया
रात 10 बजे गांव भारुखेड़ा में प्रशासन ने डेढ़ सौ बैग खाद पहुंचवाई। किसानों ने कहा कि जब वे फसल की बिजाई कर रहे थे। उस समय सरकार पर्याप्त डीएपी खाद उपलब्ध नहीं करवा पाई। जब गेहूं और सरसों को पहला पानी दिया गया। तब उनको पर्याप्त यूरिया नहीं उपलब्ध हो पाई। फसल पकाव पर है, पर प्रशासन उनको पर्याप्त खाद उपलब्ध करवाना तो दूर, कालाबाजारी को भी नहीं रोक पाई। लगातार किसानों ने ऊंचे दामों पर कच्चा आढ़तियों से खाद खरीदी। खाद के साथ दूसरे कीटनाशक भी बेचे गए। किसानों ने आरोप लगाते हुए कहा कि पैक्स के अंदर भी कालाबाजारी की जा रही है। पैक्स के अंदर बैग के 266 रुपये की बजाय 270 रुपये वसूल किए जाते हैं। पैक्स के कर्मचारी प्रभावशाली लोगों के घर पर खाद भिजवा रहे हैं। लेकिन छोटे गरीब किसान को एक बैग यूरिया भी नहीं देते।