फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sirsa News: गेहूं का 70 तो सरसों का 40 फीसदी उठान बाकी, फसल डालने के लिए नहीं बची जगह

Tue, 23 Apr 2024 10:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
विज्ञापन
 गेहूं की बोरियों से अटी मंडी। 
विज्ञापन
सिरसा। अभी तक मंडी में 70 प्रतिशत गेहूं का उठान नहीं हुआ है और वहीं 40 प्रतिशत सरसों का उठान बाकी है। हालांकि अधिकारियों की ओर से बार-बार लेबर की संख्या बढ़ाने और वाहनों की संख्या बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं। मुख्य सचिव से लेकर उपायुक्त तक बैठक लेकर फटकार लगा चुके हैं। लेकिन कोई असर होता नजर नहीं आ रहा है।
विज्ञापन

सही मायने में पिछले तीन से चार दिनों के आंकड़ों पर गौर करें तो 10 से 15 प्रतिशत की तेजी ही उठान में आई है। इस तेजी को सोमवार को आई लाखों क्विंटल गेहूं की आवक ने अचानक रोक दिया। जिसके बाद से उठान ओर धीमा हो गया है। मंडी में उठान तेजी से न होने के कारण किसानों के लिए परेशानी बढ़ गई है। किसानों को अब मंडी में गेहूं डालने के लिए जगह नहीं मिल रही है। ऐसे में आढ़तियों के पास गेहूं डालने में किसानों को दिक्कत आ रही है। वहीं आढ़तियों की ओर से गेहूं सड़क के साथ फुटपाथ पर डलवाई जा रहा है ताकि जल्द से जल्द किसान के गेहूं की बोली करवाकर तुलाई करवाई जा सके। किसानों की इस समस्या का मुख्य कारण है कि मंडियों में शेड के नीचे हजारों क्विंटल गेहूं व सरसों पड़ा हुआ है। जिसका उठान नहीं हुआ है।

बारिश हुई तो किसानों को होगा काफी नुकसान
जिस तरह का माहौल अनाज मंडी में बना हुआ है यदि ऐसे में तेज बारिश होती है तो किसानों और आढ़तियों को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। सबसे ज्यादा जिले के छोटे खरीद केंद्रों को नुकसान होगा। जहां पर एक शेड होने के कारण बड़े स्तर पर गेहूं खुले में पड़ा है।
विज्ञापन


बहाने-बहाने में निकल जाएगा सीजन
मुख्य सचिव से लेकर उपायुक्त तक खरीद एजेंसियों, मार्केट कमेटी अधिकारियों व ठेकेदारों को फटकार लगा चुके हैं। उनके सामने जी सर कहकर बड़े दावे करने के बाद धरातल पर कोई काम नजर नहीं आता है। सभी को पता है कि आगामी 10 दिनों के बाद गेहूं की आवक 90 फीसदी तक हो जाएगी। उसके बाद उठान अपने आप तेज हो जाएगा। अधिकारी जहां दूसरे अधिकारियों को फटकार लगाकर अपना काम पूरा कर लेते हैं। वहीं दूसरे अधिकारी व ठेकेदार लेबर की कमी और चुनाव का असर बताकर खानापूर्ति कर रहे हैं। इन सबके बीच में किसान पीस रहा है। जिसकी कोई सुध लेने को तैयार नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें