हरियाणा के सीनियर आईएएस अशोक खेमका की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने खेमका के खिलाफ दूसरी चार्जशीट भी मंजूर कर ली है। यह चार्जशीट अगले सप्ताह जारी की जा सकती है।
यह चार्जशीट गेहूं के 87000 क्विंटल बीज कम बेचने के आरोप में जारी की जाएगी। इससे पहले गत चार दिसंबर को रॉबर्ट वाड्रा-डीएलएफ डील में म्यूटेशन रद्द करने के आरोप में खेमका को हरियाणा सरकार चार्जशीट कर चुकी है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने अब चार्जशीट मंजूर करने की पुष्टि की है।
चकबंदी महानिदेशक के पद से ट्रांसफर होने के बाद अशोक खेमका ने 15 अक्तूबर, 2012 को हरियाणा बीज विकास निगम का प्रबंध निदेशक पद संभाला था। उससे पहले वे रॉबर्ट वाड्रा-डीएलएफ डील के तहत जमीन का म्यूटेशन रद्द करने का फरमान जारी कर चुके थे।
जब खेमका ने पदभार संभाला, उसके कुछ दिन बाद गेहूं की बिजाई शुरू होनी थी। बीज विकास निगम प्रमाणित बीज बेचने का प्रबंध करता है।
फरवरी, 2013 में कृषि मंत्री परमवीर सिंह ने कृषि विभाग से पूछा कि गेहूं का बीज कम क्यों बिका। तब निगम केएमडी अशोक खेमका थे।
खेमका ने बीज की कम बिक्री के लिए पुरानी किस्म होना और सही योजना न होना बताया था। इसके बाद उनका निगम से 4 अप्रैल, 2013 को तबादला हो गया।
कृषि विभाग के प्रधान सचिव ने मुख्य सचिव को रिपोर्ट भेजकर कहा है कि गेहूं का 87000 क्विंटल बीज कम बिकने से करीब 22 लाख रुपये का नुकसान हुआ था। मानीटरिंग सही नहीं थी।
इसके लिए तत्कालीन एमडी जिम्मेवार हैं। मुख्य सचिव कार्यालय ने खेमका की चार्जशीट तैयार मुख्यमंत्री के पास भेजी थी। मुख्यमंत्री ने पिछले सप्ताह इसे मंजूरी दे दी है।
चार्जशीट कानूनी दृष्टि से सही हो, इसके लिए चार्जशीट दो दिन पहले विधि परामर्शी के पास भेजी गई है। विधि परामर्शी से फाइनल होने के बाद मुख्य सचिव यह चार्जशीट जारी कर देंगे। संभावना है कि अगले सप्ताह यह चार्जशीट जारी होगी।
पुरानी किस्म थी, इसलिए नहीं बिका बीज : खेमका
अशोक खेमका ने मुख्य सचिव को गत 29 नवंबर को पत्र लिखा था। उन्होंने कहा था कि यह बीज इसलिए कम बिका था क्योंकि बीज की किस्मे डीबीडब्ल्यू-17 और पीबीडब्ल्यू-550 पुरानी थी और बाजार में उनकी मांग नहीं थी। असली दोष बीज पैदा करने की योजना में है।
दूसरे राज्यों में बीज बेचने पर भी कृषि विभाग ने रोक लगा दी थी। इस बीज की मार्केट कीमत ज्यादा थी जबकि उससे सस्ती दर पर बाजार में बीज उपलब्ध था।