हरियाणा में पिछले तीन से चल रही बारिश के चलते गेहूं की आवक, खरीद और उठान बाधित हो गया है। पिछले तीन दिनों में प्रदेश की मंडियों में मात्र 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई है। वहीं, अब तक कुल 60.67 लाख एमटी टन की आवक हो चुकी है और इनमें से 59.74 लाख एमटी गेहूं की खरीद हो चुकी है।
गेहूं की फसल पर इस बार शुरू से मौसम की मार झेल रही है। फसल की बिजाई से कटाई तक बारिश का अभाव बना रहा। फिर पकी फसल पर बारिश व ओलों की मार हुई। अब फसल बिक्री के लिए मंडी में पहुंची तो यहां बारिश आफत बनकर बरस रही है। बुधवार को बारिश में गेहूं से भरे बैग पूरी तरह भीग गए। उठान के अभाव में खुले आसमान तले रखा गेहूं इससे पहले भी बारिश में भीग चुका है। ऐसे में गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
अनाज मंडी इन दिनों गेहूं से अटी पड़ी है। मंडी में करीब ढ़ाई लाख बैग यानी करीब सवा लाख क्विंटल गेहूं रखा है। इनका उठान धीमी गति हो रहा है। इस कारण बार-बार हो रही बारिश में गेहूं भीग रहा है। किसानों व आढ़तियों की मानें तो गेहूं ढकने के लिए पर्याप्त मात्रा में तिरपाल तक नहीं है। यही नहीं, गेहूं को बारिश से बचाने के लिए मजदूरों को बार-बार बैग इधर-उधर करने पड़ रहे हैं। इससे श्रमिकों की मेहनत भी बढ़ गई है।
अनाज मंडी में फसल को भीगने से बचाने के लिए प्रशासन की तरफ से कोई खास इंतजाम नहीं किए गए है। डीसी के आदेश के बाद भी उठान धीमी गति से चल रहा है। जिसके गेहूं के बैग शेडों से बाहर पड़े हुए हैं। पहले आई बारिश में भी गेहूं भीग चुका है। बुधवार को भी ऐसा ही हुआ। गेहूं खराब होने पर कौन जिम्मेवार होगा। -डिंपल कुमार, पूर्व प्रधान, आढ़ती एसोसिएशन
गेहूं की ढेरियां अब मंडी में कहीं नहीं हैं। जितना गेहूं रखा हुआ है, वह बैग में पैक है। गेहूं के उठान की जिम्मेदारी एजेसियों की हैं। एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। -देवेंद्र ढुल, सचिव, अनाज मंडी।
यहां भी भीगा गेहूं