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Rohtak: शहर में रहने वाले मतदाताओं को गांव बुलाने के लिए कर रहे मनुहार, चुनाव में तय कर सकते हैं हार-जीत

Sun, 30 Oct 2022 07:00 AM IST
भूपेंद्र सिंह रामभज दलाल, संवाद न्यूज एजेंसी, सांपला, रोहतक (हरियाणा)

सार

सरपंच पद के चुनाव में शहरी मतदाता महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनका मत चुनाव को प्रभावित करता है। इन्हें लुभाने के लिए उम्मीदवार तमाम जतन कर रहे हैं। ज्यादातर गांवों में यही हाल है।
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चुनाव को लेकर चर्चा करते मतदाता। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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पंचायत चुनाव प्रक्रिया के तहत मतदान का समय नजदीक आने के बाद इलाके में चुनावी सरगर्मियां बढ़ने लगी हैं। नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उम्मीदवारों के पास अब चुनाव प्रचार व रूठों को मनाने के लिए केवल दस दिन शेष हैं। उम्मीदवार शहर में रहने वाले मतदाताओं को अपने पक्ष में मतदान करने के लिए गांव बुलाने की मनुहार करने लगे हैं।  

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बता दें कि गांवों की कई वोट ऐसी हैं जो शहरों में रहती हैं। ये उम्मीदवारों की जीत-हार तय कर सकते हैं। सरपंच पद के चुनाव में ऐसे वोटर बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन्हें लुभाने के लिए उम्मीदवार तमाम जतन कर रहे हैं। ज्यादातर गांवों में यही हाल है। एक-दूसरे से जानकारी लेकर ऐसे मतदाताओं का पता लगाया जा रहा है।

हालांकि अधिकांश ग्रामीणों का तर्क है कि गांव के विकास करवाने वाले उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे। गांव इस्माईला, खरावड़, पाकस्मा, समचाना, हसनगढ़ की बड़े गांव में गिनती है। इन सभी गांवों में करीब 100 से अधिक संख्या में मतदाता शहर में रह रहे हैं। चुनाव को ये मतदाता सीधे तौर पर प्रभावित कर सकते हैं।
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गांव में धड़ों में बंट रहे मतदाता
उम्मीदवारों की तरह गांवों में मतदाताओं के भी धड़े बनने शुरू हो गए हैं। कोई सरपंची को लेकर दावेदार के पक्ष में है तो दूसरा उसे हराने के लिए लोगों को एकजुट कर रहा है। इसको लेकर गांवों में पंचायतों का दौर भी चल रहा है। शाम तक लोग हुक्के पर इसी बात को लेकर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। देर रात तक दावेदार भी घर-घर जाकर रूठों को मनाने में लगे हैं।

यह भी पढ़ें : Haryana: नौ जिलों में जिला परिषद-ब्लॉक समिति के लिए पहले चरण का मतदान आज, मंत्रियों-विधायकों की साख दांव पर

कई गांव ऐसे भी हैं जहां पुराने सरपंच ही इस बार या तो सीधे सरपंच के दावेदार हैं या अपने परिवार के नजदीकी को चुनाव में उतार रहे हैं। इससे एक कदम आगे कई जिला परिषद चुनाव में भाग्य आजमा रहे हैं। महिला सीट होने पर कुछ ने अपनी पत्नी को चुनाव में उतारा है। वहीं ब्लॉक समिति में भी अंदर खाते प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित कराने में जुटे हैं। 

जमीनी स्तर से सोशल मीडिया तक हो रहा चुनाव प्रचार
जमीनी स्तर से सोशल मीडिया तक चुनाव का प्रचार हो रहा है। फेसबुक, व्हाट्सएप चुनावी चर्चाओं से भरे पड़े हैं। चौक-चौराहों पर पोस्टर वार जारी है। चाय, परचून की दुकानों पर चर्चा का दौर शुरू है। इससे गुमटियां चलाने वाले दुकानदारों की कमाई बढ़ गई है। हालांकि अधिकांश वोटर खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं। 
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विकास व भलाई के कार्य करने वालों को देंगे वोट
ग्रामीण राजबीर सिंह, रोशन, जीत राम का कहना है कि गांव में जो व्यक्ति नशे का प्रचार करेंगे उन्हें मतदान नहीं करेंगे। जो व्यक्ति गांव के विकास व भलाई का काम करेंगे उन्हीं को वोट देना अच्छा है। गांव में सफाई व्यवस्था, स्कूल व गांव में मैरेज हॉल, पेयजल की व्यवस्था के अलावा युवाओं के लिए खेल की व्यवस्था करने वाले को ही मतदान किया जाएगा।

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