रोहतक। कोरोना के कारण बिगड़ते हालातों के बीच जिले के मरीजों को मंगलवार को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अस्पताल के डॉक्टरों के 11 जनवरी मंगलवार को सामूहिक अवकाश पर जाने से ओपीडी सेवाएं बंद रहेगी। पीजीआई महामारी के कारण पहले ही ओपीडी सेवाएं बंद कर चुका है। ऐसे में आपातकालीन विभाग में मरीजों की भीड़ बनी रहने की उम्मीद है।
एचसीएमएस (हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेस) एसोसिएशन ने पीजी पॉलिसी व स्पेशलिस्ट कैडर बनाने और एसएमओ की सीधी भर्ती पर स्थायी रोक की मांग पूरी न होने के चलते मंगलवार को सामूहिक अवकाश पर जाने का कदम उठाया है। इस संबंध में एसोसिएशन ने 4 जनवरी को अल्टीमेटम दिया था। ऐसे में आपातकालीन विभाग की व्यवस्था चरमराने की भी आशंका बन गई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जसबीर परमार ने कहा कि सरकार को दिए अल्टीमेटम में साफ कहा गया है कि 10 जनवरी तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो 11 जनवरी को सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। सरकार की ओर से सोमवार शाम तक भी कोई जवाब नहीं मिला। इसलिए सामूहिक अवकाश पर जाने का फैसला लिया गया है।
पीजीआई का विकल्प भी बंद
एचसीएमएस डॉक्टरों की हड़ताल इस बार परेशानी खड़ी कर सकती है। इसकी बड़ी वजह पीजीआई का विकल्प भी मरीजों के लिए बंद होना है। पीजीआई ने भी महामारी का खतरा देखते हुए ओपीडी सेवाएं बंद कर दी हैं। यहां मेडिसन, स्त्री रोग, शिशु व सांस रोगियों के ही चार विभाग काम करेंगे। इनमें भी कुल 300 ही मरीजों को देखा जाएगा। ऐसे में अस्पताल बंद होने पर पीजीआई से मिलने वाली राहत भी अब नहीं मिलेगी।
महामारी से लड़ने को डटे रहे डॉक्टर
एसोसिएशन का कहना है कि महामारी कॉल में डॉक्टर प्रथम कतार के कोरोना योद्धा के रूप में डटे रहे। अपनी जान का जोखिम उठाकर मरीजों को लगातार स्वास्थ्य लाभ पहुंचाते रहे हैं। अब भी कोरोना के बढ़ते खतरे में डॉक्टर प्रथम पंक्ति में खड़े हैं। मरीजों को स्वास्थ्य लाभ दिया जा रह है। जबकि इस वर्ग की अनदेखी की जा रही है। यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।