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हमारी सांस में मां भारती की रूह बसती है...

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हरियाणा साहित्य अकादमी पंचकूला एवं हरियाणा साहित्य दर्पण, साहित्यिक संस्था ने हरियाणा के स्थापना दिवस के मौके पर हास्य कवि-सम्मेलन आयोजित किया। इस दौरान कवियों ने हास्य रस से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। सम्मलेन किड्स पैराडाइज स्कूल डीएलएफ कॉलोनी में आयोजित किया। मुख्य अतिथि आकाशवाणी केंद्र के निदेशक सतीश शर्मा रहे।
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कवि सम्मेलन के शुभारंभ पर कंचन मखीजा ने सरस्वती वंदना से की। कवयित्री खुशबू जैन ने कहा हमारी सांस में मां भारती की रूह बसती है...। गीतकार वीरेंद्र ‘मधुर’ ने कहा न हिंदू हूं न मुस्लिम हूं मैं ईश्वर की निशानी हूं...। गजलकार सतपाल स्नेही ने शृंगार रस की प्रधानता रखते हुए कहा ये जो मुझमें पीड़ाएं हैं, बहुत सताती हैं। रेवाड़ी से आए हलचल हरियाणवी ने हास्य पाठ करते हुए कहा रिश्वत देकर नौकरी, नकल मार कर पास...। इसे सुनकर श्रोताओं ने खूब ठहाके लगाए। सुरेश मक्कड़ साहिल ने बेशक नई पुरानी लिख, लेकिन बात सयानी लिख कविता सुनाई। सम्मेलन में कवियों ने अपने काव्य से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। कवि जोगिन्द्र मोर, युवा कवि पवन गहलोत, सुनिता बहल ने भी काव्य पाठ किया। अंत में हरियाणा साहित्य दर्पण के सदस्य जेपी गौड़, वीरेंद्र वशिष्ट स्कूल के संस्थापक मनोज मलिक, प्राचार्या पूजा मलिक ने अतिथियों का आभार जताया। अध्यक्ष मंडल में डॉ. पूर्णचंद शर्मा, डॉ. नरेश मिश्र व डॉ. माया मालिक रहे। संचालन कवि वीरेन्द्र मधुर ने किया।
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