मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) व जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव खत्री सौरभ ने कहा है कि पत्रकारों के हत्यारोपी जांच में बच जाते हैं। शक्तिशाली लोगों के खिलाफ रिपोर्टिंग करना जोखिम भरा काम हो सकता है। वह आजादी का अमृत महोत्सव के तहत प्राधिकरण सभागार में इंटरनेशनल डे टू इम्युनिटी फॉर क्राइम अगेंस्ट जर्नलिस्ट पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक दशक में औसतन हर चार दिन में एक पत्रकार की हत्या हुई है। कई पत्रकार बिना सशस्त्र संघर्ष वाले देशों में मारे गए हैं। अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल और जमाल खाशोगी की हत्याएं इसका उदाहरण हैं। सिर्फ अपना काम करने के लिए 2006 से 2020 के बीच बड़ी संख्या में पत्रकारों की हत्या कर दी गई। औसतन दस में से 9 मामलों की पैरवी ठीक ढंग से नहीं हो पाती, जिसके परिणामस्वरूप हत्यारे बच निकलते हैं। अन्य संगठनों में काम करने वाले लोगों के नाम तो गुप्त रहते हैं लेकिन पत्रकारों का नाम सार्वजनिक रहता है। इसलिए उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ता है। सीजेएम खत्री सौरभ ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि मीडिया कर्मियों को न केवल दबाव झेलना पड़ता है, बल्कि उनकी जान को भी खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव के तहत सभी गांवों में कानूनी साक्षरता व सहायता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। अधिवक्ता राजबीर कश्यप ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दो नवंबर को प्रस्ताव पास कर इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया था। यह तारीख दो नवंबर 2013 को माली में मारे गए दो फ्रांसीसी पत्रकारों की याद में चुना गया था। सीजेएम खत्री सौरभ ने जिला सूचना व जनसंपर्क अधिकारी संजीव सैनी को स्मृति चिह्न भेंट किया।