अमर उजाला के चार दिवसीय कार्यक्रम मां तुझे प्रणाम... का वीरवार को हवन के साथ आगाज हुआ। एमडीयू के सहयोग से मातूराम यज्ञशाला में आयोजित सद्भावना हवन में मुख्य यजमान एलपीएस बोसार्ड के एमडी उद्योगपति राजेश जैन व नाड़ी वैद्य कायाकल्प के संचालक सत्यप्रकाश आर्य रहे। एमडीयू के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह, कुलसचिव प्रो. गुलशन तनेजा विशेष रूप से उपस्थित रहे। सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष स्वामी आर्यवेश, प्रो. सुरेंद्र कुमार, महर्षि दयानंद सरस्वती पीठाध्यक्ष प्रो. रविप्रकाश आर्य, एडीसी के पीए सत्यवीर फौगाट व बलराज आर्य ने विधिपूर्वक हवन संपन्न कराया। महामंडलेश्वर कपिलपुर ने भी हवनकुंड में आहुति देकर विश्व कल्याण व शांति की कामना की।
स्वामी आर्यवेश ने कहा कि समाज में सद्भावना कैसे पैदा हो, इस ओर सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। सद्भावना हवन एक प्रक्रिया है। समाज की उन्नति के लिए हर व्यक्ति का प्रयास हवन है। इसमें सैनिक, शिक्षक, विश्वविद्यालय व जनकल्याण के सभी प्रयास यज्ञ की श्रेणी में आता है। राष्ट्र में भी इसी तरह कार्य होने चाहिए। इसे देश निश्चित उन्नति करेगा। वेद सृष्टि के प्रारंभ में आता है। देश में वैदिक मान्यताओं का प्रभाव रहा है। बाद में अनेक मान्यताओं व विचारधाराओं ने जन्म लिया। वैदिक संस्कृति किसी देश, जाति, धर्म, समाज या वर्ग विशेष के लिए नहीं, संपूर्ण मानव जाति के लिए है। वेद के हर मंत्र का उद्देश्य सभी का कल्याण व उत्थान का है। वेद का कहना है कि न कोई छोटा है न बड़ा, न कोई ऊंचा है न कोई नीचा। सभी समान हैं। हमें मिल कर सद्भावना व देश की उन्नति के लिए काम करना होगा।
सामाजिक ज्ञान का खास महत्व : प्रो. राजबीर सिंह
एमडीयू के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान का उद्देश्य ज्ञान का विस्तार करना होता है। ज्ञान महज अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं होता है। ज्ञान कक्षा में ही नहीं मिलता है, इससे बाहर भी होता है। किताबों से बाहर का सामाजिक ज्ञान अपना खास महत्व रखता है। इसकी जानकारी भी मनुष्य के लिए जरूरी है। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय पिछले 46 वर्षों से इस हवन को सफल बनाने में जुटा है। नई शिक्षा नीति युवाओं को जीवन में आगे बढ़ाने में अहम साबित होगी। महर्षि दयानंद महान विचारक थे। उनके विचारों को आत्मसात करने व दूसरों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में आर्य समाज व विवि परिवार ने विवि के दोनों प्रवेश द्वार पर ओम शब्द अंकित कराने की अपील की थी। यह काम हो गया है। ओम शब्द का अपना महत्व है। यह मन-मस्तिष्क पर असर छोड़ता है। विवि महर्षि की सोच को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है।
सद्भावना यज्ञ समाज की एकता व शांति के लिए : राजेश जैन
उद्योगपति राजेश जैन ने कहा कि सद्भावना यज्ञ समाज की एकता व शांति के लिए है। समाज में ऊर्जा व एकता की जरूरत है। इसी से स्वतंत्रता का सपना साकार हुआ है। हमें मिलकर देश हित में कार्य करना चाहिए। अफगानिस्तान व अन्य देशों से हमें इस बात की सीख लेनी चाहिए। अमेरिकी सेना ने वहां तीन लाख लोगों को संघर्ष करना सिखाया, मगर उन्होंने अपने आपसे लड़ना नहीं सीखा। इसीलिए कुछ तालिबानी हावी हो गए। भगवान भी उन्हीं की मदद करता है जो खुद अपनी मदद करते हैं। इसलिए हमें भी अपने लिए प्रयास करने होंगे।
यज्ञ हमारी परंपरा का हिस्सा : सत्यप्रकाश आर्य
नाड़ी वैध कायाकल्प के संचालक सत्यप्रकाश आर्य ने कहा कि सद्भावना यज्ञ समाज व जनहित में सराहनीय कार्य है। ऐसे आयोजन होते रहने चाहिए। यज्ञ हमारी परंपरा का हिस्सा है। यह वैज्ञानिक दृष्टि से भी साबित भी हो चुका है। हवन पर्यावरण की शुद्धता के साथ रोगाणुओं व कीटाणुओं को भी समाप्त करता है। आधुनिकता की दौड़ में हम इस परंपरा को बिसरा रहे हैं। हमें वैदिक संस्कृति की ओर लौटना होगा। इसी से जीवन सार्थक होगा। हवन प्रक्रिया को अपना कर हम अपना वातावरण शुद्ध रख सकते हैं। यह महामारी काल में और भी जरूरी हो गया है।