सेना के जवान सीमा पर ही नहीं, बल्कि हर समय देश की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। ऐसा ही एक मामला रोहतक शहर के दिल्ली बाईपास चौक पर देखने को मिला। यहां मंगलवार देर रात एक आई-10 कार चालक लापरवाही और तेज गति से गाड़ी चलाते हुए आया। यहां सड़क किनारे खड़े आर्मी के जवान सचिन कुमार ने दोस्त सुरेंद्र की जान बचाने के लिए उसे दूसरी ओर धकेल दिया, लेकिन खुद कार के नीचे आ गया। हादसे में उसकी मौत हो गई।
सुरेंद्र ने थाने में अज्ञात कार चालक के खिलाफ आईपीसी की धारा 279 और 304ए के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है। उधर, बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद जवान के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
लाढ़ौत के सुरेंद्र ने आर्यनगर थाने में दी शिकायत में बताया कि सिसाना (सोनीपत) निवासी सचिन करीब आठ साल पहले स्पोर्ट्स कोटे (बॉक्सिंग) से आर्मी में कांस्टेबल के पद पर नौकरी लगे थे। उनका एक छोटा भाई है और डेढ़ साल की एक बेटी है। मंगलवार रात 9 बजे सचिन ने उसे दिल्ली बाईपास चौक पर मिलने के लिए बुलाया।
सचिन का परिवार के साथ फाइल फोटो।
दोनों दोस्त सड़क किनारे खड़े होकर बात कर रहे थे। जिस तरफ मेरी पीठ थी, उसी ओर से आई-10 चालक कार को लापरवाही से चलाते हुए आया। सचिन ने मेरी जान बचाने के लिए मुझे दूसरी ओर धकेल दिया, लेकिन खुद कार की चपेट में आ गया। गंभीर रूप से घायल सचिन को राहगीरों की मदद से पोजीट्रोन अस्पताल लेकर गए। मगर हालत गंभीर देखकर चिकित्सकों ने उन्हें दाखिल करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद कायनोस अस्पताल लेकर गए। यहां इलाज के दौरान सचिन की मौत हो गई। हादसे की सूचना परिजनों और पुलिस को दी गई।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया और उन्होंने जवान को मुखाग्नि दी। सचिन को 26 जून की शाम को पुणे के लिए रवाना होना था। पुलिस ने सुरेंद्र की शिकायत पर अज्ञात आरोपी कार चालक के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।
आर्मी में बॉक्सिंग के लिए कर रहे थे तैयारी
परिजनों ने बताया कि सचिन आर्मी की ओर से होने वाली चैंपियनशिप की तैयारी कर रहे थे, इसके लिए वह पुणे में अभ्यास कर रहे थे। वहीं से छुट्टी लेकर अपने गांव आए थे। उन्हें 26 जून को वापस जाना था।
देखते-देखते दोस्त चला गया और मैं कुछ न कर सका
छुट्टी खत्म होने के एक दिन पहले ही मैं उससे मिला था। मगर यह नहीं पता था कि जीवनभर के लिए बिछड़ना हो जाएगा। दोस्त ने अंतिम समय में मेरी जान बचाने के लिए अपने आपको कुर्बान कर दिया। देखते-देखते ही मेरी आंखों के सामने सचिन मुझे छोड़कर चला गया और मैं कुछ नहीं कर सका। - जैसा कि सचिन के दोस्त सुरेंद्र ने बताया