रोहतक। कक्षा 8वीं की बोर्ड परीक्षा को लेकर शिक्षा विभाग व सरकार में घमासान मचा है। मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने इस मामले को लेकर 25 फरवरी को चंडीगढ़ में सायं 3 बजे बैठक करेंगे। बैठक में सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों की यूनियन से जुड़े सभी संगठनों को आमंत्रित किया गया है। इसमें 8वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा संबंधी फैसले पर पुन: चर्चा की जाएगी।
स्कूल कैडर लेक्चरर एसोसिएशन (सलाह) ने बैठक को लेकर कड़ी आपत्ति जताते हुए यह बैठक रद्द करने की मांग की है। सलाह की मांग है कि बैठक में सभी सरकारी स्कूलों के अध्यापकों-प्राध्यापकों से जुड़ी तमाम यूनियनों को भी बुलाया जाए। सलाह के राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक शर्मा एवं राज्य संगठन सचिव संजय गौतम, भूपेंद्र मलिक, प्रदेश कोषाध्यक्ष अजय मलिक ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों की एसोसिएशन को बुलाकर मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री एकतरफा फैसला लेना चाहते हैं। जबकि सरकारी स्कूलों से जुड़ी अध्यापकों की यूनियनों को बैठक में आमंत्रित ही नहीं किया गया है। यह समझ से परे है।
8वीं कक्षा को बोर्ड बनाने के लिए बोर्ड के चेयरमैन डॉ. जगबीर सिंह से पिछले चार वर्षों में कई बार संगठन के पदाधिकारी सलाह प्रधान राजकुमार शर्मा के नेतृत्व में मुलाकात कर चुका है। सलाह के प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2022 में 8वीं को बोर्ड बनाने के निर्णय को लागू किया गया। बोर्ड बनाने से शिक्षा के स्तर में सुधार होगा। विद्यार्थियों के स्तर में गुणवत्तापरक परिवर्तन होगा। इससे पूर्व बोर्ड नहीं होने से बच्चों को फेल होने का डर नहीं था। इस कारण वे शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं थे। मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री निजी स्कूलों के दबाव में न आकर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के हितों को भी ध्यान में रखें। बोर्ड परीक्षा के संबंध में बार-बार निर्णय बदलने से विद्यार्थियों एवं अध्यापकों में संशय की स्थिति पैदा होती है। इस वर्ष 8वीं की संभावित बोर्ड परीक्षा एससीईआरटी के माध्यम से ली जाएगी। भिवानी बोर्ड परीक्षाओं का संचालन करेगा। परीक्षा परिणाम का सर्टिफिकेट भी एससीईआरटी की ओर से जारी किया जाएगा। आरटीई लागू होने के कारण वर्ष 2010 में अंतिम बार आठवीं की परीक्षा ली गई थी।