डॉक्टर आफ मेडिसन (एमडी) और मास्टर आफ सर्जरी (एमएस) की प्रवेश परीक्षा में नकल के एक बहुचर्चित मामले में बृहस्पतिवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुधीर जीवन की अदालत ने पिछले आठ साल से नकल और पेपर लीक करने का आरोप झेल रहे 23 डॉक्टरों सहित 25 लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। सरकारी पक्ष की ओर से आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में एक भी पुख्ता सबूत पेश नहीं किया जा सका। इस कारण सभी को बरी कर दिया गया।
अदालत में चले अभियोग के अनुसार 24 फरवरी 2008 को पीजीआई में डॉक्टर आफ मेडिसन (एमडी) और मास्टर आफ सर्जरी (एमएस) की प्रवेश परीक्षा हुई। परिणाम रात को ही जारी कर दिया गया। परिणाम जारी होने के बाद ही कुछ डॉक्टरों ने परीक्षा में नकल और पेपर लीक होने सहित अन्य अनियमितताओं का आरोप लगाया। आरोप था कि परीक्षा देने वाले कुछ डॉक्टरों ने परीक्षा नियंत्रक के माध्यम से पेपर लीक करवाया। इसके बाद विनोद कुमार नामक आरोपी की दुकान पर उसकी फोटो कॉपी कराई। फोटो कॉपी कराने के बाद सभी आरोपियों तक पेपर पहुंचा दिया गया। आरोप था कि पेपर में धांधली के कारण अयोग्य डॉक्टरों की नियुक्ति हो गई। आरोप गंभीर होने के कारण जांच के लिए 29 फरवरी 2008 को पीजीआई और एमडीयू से चार सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई। कमेटी में डॉक्टर विजय जैन, प्रोफेसर सुरेंद्र कुमार, प्रोफेसर आर. के. श्रीवास्तव और प्रोफेसर सी. पी. श्योराण को शामिल किया गया। कमेटी ने 11 मार्च 2008 को प्रबंधन को रिपोर्ट सौंपी। लेकिन इस रिपोर्ट में भी आरोप साबित नहीं हो सके। मामला बढ़ा तो प्रदेश सरकार के आदेश पर 23 डॉक्टरों सहित 25 लोगों पर केस दर्ज करके मामले की जांच स्टेट विजिलेंस ब्यूरो अंबाला के डीआईजी महेंद्र सिंह अहलावत को सौंप दी गई। जांच पड़ताल के बाद स्टेट विजिलेंस ने आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया था।
इन धाराओं में दर्ज हुआ था केस
आरोपी पक्ष के वकील आर. सी. दलाल के अनुसार स्टेट विजिलेंस ने परीक्षा देने वाले डॉक्टर पुरुषोतम, डॉ. अश्वनी कुमार, डॉ. कु लभूषण, डॉ. जगदीश, डॉ. सुभाष कु मार, डॉ. अजय छिक्कारा, डॉ. गौरव और डॉ. सुनील की शिकायत पर परीक्षा नियंत्रक सुखबीर सिंह, फोटो कॉपी करने वाले विनोद कुमार और एमसीएमएस डॉ राजेश कुमार सहित 23 डॉक्टरों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 धोखाधड़ी, 120बी षड्यंत्र में शामिल, 13 वनडी, पीसीएक्ट के तहत केस दर्ज किया था।
ये डॉक्टर हुए बरी
अदालत ने पूरे मुकदमे की सुनवाई के बाद सबूतों के अभाव में डॉक्टर राजेश कुमार (एमसीएमएस), सुखबीर सिंह (परीक्षा नियंत्रक), विनोद कुमार (फोटो कॉपी करने वाला), डॉ. अमित जिंदल, डॉ. प्रवीण सोलंकी, डॉ. हरीश मलिक, डॉ. धीरज कुमार, डॉ. आशीष कुमार, डॉ. कवंर सिंह, डॉ. बिजेंद्र सिंह, डॉ. महेश कुमार, डॉ. शरद यादव, डॉ. प्रीती चौधरी, डॉ. विनीता देशवाल, डॉ. पालीराम, डॉ. वरुण आर्या, डॉ. शैलेष खेत्रपाल, डॉ. गौरव सचदेवा, डॉ. गगनदीप, डॉ. शैलेंद्र कुमार, डॉ. अमित कुमार सिन्हा, डॉ. महेंद्र प्रसाद, डॉ. धीरज गुप्ता, डॉ. रंजू सोनी और डॉ. संतोष कुमार को बरी कर दिया।
दोबारा हुई थी परीक्षा
वकील दलाल ने बताया कि मामला उजागर होने और केस दर्ज होने के बाद परीक्षा दोबारा आयोजित कराई गई ताकि पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने बताया कि सरकारी पक्ष की ओर से अदालत में एक बार भी यह साबित नहीं किया गया कि पेपर कब और कैसे लीक हुआ। साथ ही नकल करने का तरीका क्या रहा। केवल उनकी तरफ से कहा गया कि उन्होंने नकल और भ्रष्टाचार की चर्चा सुनी थी। इस कारण पुलिस को शिकायत की।
बेटे की शादी का पहला कार्ड नहीं चढ़ा पूर्वजों पर, कोर्ट में किया पेश
लगातार आरोपों से शर्मिंदगी झेलने के बाद जैसे तैसे करके बेटे की शादी का मुहूर्त निकला। शादी की तिथि पर कोर्ट में कहीं सुनवाई की तारीख न लग जाए, इस कारण कोर्ट में शादी की तिथि बताने गया। सबूत के तौर पर प्रिंटिंग प्रेस से लाकर पहला कार्ड जमा करवाया। जबकि परिवार की परंपरा के अनुसार पहला कार्ड पूर्वजों और देवी देवताओं के यहां चढ़ाया जाता है। कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए आरोप झेल रहे एक डॉक्टर के पिता ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था कि हमें न्याय जरूर मिलेगा।
जो समय पढ़ाई और भविष्य संवारने का उसी में काटने पड़े चक्कर
पीड़ित के परिजनों का कहना है कि जो समय उनके बच्चों की पढ़ाई और भविष्य संवारने का था। उसी समय में बच्चों सहित पूरा परिवार पुलिस के चक्कर काटने पर मजबूर हो गया। मकसद सिर्फ एक था कि पढ़ाई और परिवार पर लगा झूठा दाग मिट सके। अदालत के फैसले के बाद परिजनों ने कहा कि बहुत दिन बाद चैन की सांस ली है।
कोई शादी तक को भी नहीं हुआ तैयार
फैसले के समय कोर्ट में पीड़ितों के परिजन भी मौजूद रहे। परिजनों ने कहा कि उन्होंने पिछले आठ साल बहुत मुश्किल से गुजारे हैं। क्योंकि जिस समय बेटों और बेटियों की शादी का समय था, उसी समय उन पर इस तरह के संगीन आरोप लगा दिये गए। जब भी शादी की बात करने कहीं पर जाते थे तो सभी संदेह की नजर से देखते थे। इसके बाद आनाकानी करके रिश्ते को मना कर देते थे। परिजनों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।