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आरडीए की हड़ताल 7 दिन के लिए स्थगित, काम पर लौटे डाॅक्टर

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पीजीआई में पीजी डॉक्टरों की हड़ताल के दौरान बीमार मां को लेकर पहुंचे परिजन। अमर उजाला
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पीजीआई में रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) की हड़ताल वीरवार को 7 दिन के लिए स्थगित कर दी गई। इससे आपात सेवाएं बहाल होने से गंभीर मरीजों को कुछ राहत मिली। वहीं इससे पहले हड़ताल के चौथे दिन मरीज धक्के खाने को मजबूर हुए। ओपीडी व आपात विभाग में इलाज के लिए आए मरीजों को दवा लिखकर घर भेज दिया गया। गंभीर मरीजों को भी घंटों इंतजार के बाद मायूस लौटना पड़ा।
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ओपीडी में वीरवार सुबह 11 बजे के बाद कार्ड नहीं बनाए गए। इस कारण देरी से आने वाले मरीज इधर-उधर भटकते रहे। बाद में आपात विभाग में देर तक मरीजों की भीड़ लगी रही। शाम को स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. अनीता सक्सेना के नेतृत्व में आरडीए (रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन) प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में हड़ताल स्थगित करने पर सहमति बनी। इसके बाद चौथे दिन पीजी डॉक्टरों ने सात दिन के लिए हड़ताल स्थगित करने का फैसला लिया। यही नहीं, पिछले चार दिन में औसतन 50 ऑपरेशन रोज के हिसाब से करीब 200 केस लंबित हो गए हैं। अब चिकित्सकों पर काम की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। नीट-पीजी की काउंसिलिंग में देरी के चलते फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) के समर्थन में आरडीए की हड़ताल वीरवार को चौथे दिन भी जारी रही थी। इससे मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। ओपीडी में मरीज इधर-उधर भटकते रहे। आपात विभाग में भी मरीजों को जांच के बाद परामर्श ही मिला। यहां से दवा लिखकर मरीजों को घर भेज दिया गया। इससे मरीज परेशान रहे।
शाम को ही पीजी चिकित्सक काम पर लौटे
इधर, रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ वीरवार शाम कुलपति डॉ. अनीता सक्सेना व निदेशक डॉ. गीता गठवाला ने कुलपति कार्यालय में अहम बैठक की। यहां सकारात्मक बातचीत हुई। सभी रेजिडेंट डॉक्टरों ने एक स्वर में एक सप्ताह तक के लिए हड़ताल टालकर वापस काम पर जाने का फैसला लिया। शुक्रवार से संस्थान में ओपीडी पहले की तरह निर्धारित समय पर सामान्य रूप से चलेगी। हड़ताल समाप्त कर वीरवार शाम को ही पीजी चिकित्सक आपात व ट्रॉमा सेंटर समेत सभी विभागों में ड्यूटी पर लौट गए।
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नहीं हो सके मरीजों के ऑपरेशन
पीजीआई के ऑपरेशन थियेटर में रोजाना 50 मरीजों के ऑपरेशन किए जाते हैं। पिछले चार दिन से हड़ताल के चलते ओटी बंद रही। इस कारण मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो सके। यह आंकड़ा करीब 200 बनता है। अब हड़ताल समाप्ति के बाद चिकित्सकों पर यह कार्यभार निपटाने की भी जिम्मेदारी रहेगी। इसके लिए प्राथमिकता के आधार पर ऑपरेशन किए जाने की तैयारी की जा रही है।
अवकाश शुरू होने से वरिष्ठ चिकित्सकों को राहत
पीजीआई में पीजी चिकित्सकों की हड़ताल स्थगित होने से वरिष्ठ चिकित्सकों को बड़ी राहत मिली है। अब वे अपने शीतकालीन अवकाश पर जा सकेंगे। शुक्रवार से ही ये अवकाश शुरू हो रहे हैं। संस्थान में एक दिसंबर से शुरू हुए शीतकालीन अवकाश हड़ताल के कारण रद्द कर दिए गए थे। इस कारण वरिष्ठ चिकित्सकों को ड्यूटी पर लौटना पड़ा था।
वर्जन
पीजी डॉक्टरों की हड़ताल स्थगित हो गई है। चिकित्सकों को समझाकर हड़ताल वापस लेने के लिए मना लिया गया है। शुक्रवार से संस्थान में सामान्य रूप से पहले से ही निर्धारित समय पर ओपीडी चलेगी।
- डॉ. ईश्वर सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआई
वर्जन
यहां आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना होगा। इसके लिए संस्थान के सभी सदस्य मिलकर हर संभव प्रयास कर रहे हैं। वरिष्ठ चिकित्सकों ने भी हड़ताल स्थगित की सूचना मिलने पर अपने शीतकालीन अवकाश रद्द कर ड्यूटी पर लौटने में देरी नहीं की। यह फैकल्टी के सेवाभाव को साफ दर्शाता है। शुक्रवार से दोबारा फैकल्टी सदस्यों की छुट्टियां शुरू हो गई हैं।
- डॉ. गीता गठवाला, निदेशक, पीजीआई
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पीजीआई में मरीजों से बातचीत
कान के इलाज के लिए भटक रहा हूं
पीजीआई की ओपीडी में कान के इलाज के लिए भटक रहा हूं। कान के पास छेद है। इसमें से बुधवार से तरल पदार्थ निकल रहा है। कान के पास सूजन भी आई हुई है। तेज दर्द हो रहा है। अब यहां ओपीडी कार्ड नहीं बन रहा है। कर्मचारी का कहना है कि 11 बजे के बाद कार्ड बनाना बंद कर दिया गया है। अब फिर आना पड़ेगा।
- संदीप, सांघी
कैथल से किराया लगाकर आई, रात को यहीं रुकना पड़ेगा
गले में बहुत दर्द है। इलाज के लिए सुबह चार बजे कैथल से चली थी। ट्रेन देरी से पहुंची। इस कारण पीजीआई में समय पर नहीं पहुंच पाई। अब कर्मचारी कार्ड बनाने से मना कर रहा है। यहां आने पर पता चला कि डॉक्टर भी हड़ताल पर हैं। इतनी दूर से किराया लगाकर आई हूं। इसलिए रात यहीं गुजारनी पड़ेगी।
- सुमन, कैथल
अब रात को यहीं रुकना पड़ेगा
मेरे गले की नली रुकी हुई है। पेट व सीने में दर्द है। इस कारण हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए वीरवार का समय दिया था। डॉक्टरों की हड़ताल के कारण ऑपरेशन नहीं हो पाया। अब भी दवा देकर घर ले जाने की बात कह रहे हैं। अब रात को यहीं रुक कर सुबह दोबारा इलाज के लिए प्रयास करेंगे।
- भरपाई, भिवानी
डॉक्टर एक से दूसरे विभाग में चक्कर लगवा रहे
काफी समय से सांस की तकलीफ है। इसका पीजीआई से इलाज चल रहा है। वीरवार को यहां आया तो डॉक्टर एक से दूसरे विभाग में चक्कर लगवा रहे हैं। ओपीडी में दूसरे विभाग में दिखाने के लिए पहले डॉक्टर की मुहर लगवानी थी, जबकि कार्ड बनाने बंद हो चुके हैं। कर्मचारी चले गए हैं। इसलिए मुहर ही नहीं लगी है।
- दिलबाग, बहुअकबरपुर
इलाज मिला न भर्ती किया
मेरे मामा भागवत को इलाज के लिए पीजीआई लाए हैं। वे बुलंदशहर से हमारे घर आए थे। चाय पीते समय अचानक बेहोश हो गए थे। अब यहां उन्हें न तो इलाज मिल रहा है, न कोई भर्ती कर रहा है। डॉक्टरों ने जांच के बाद घर ले जाने के लिए कहा है, जबकि हालत ज्यादा खराब है। कोई सुनवाई नहीं कर रहा है।
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- दिलबाग, भिवानी
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