हाथ में तिरंगा झंडा लेकर टीवी पर मैच देखते नेहा की मां व बहन।
- फोटो : Sonipat
ओलंपिक खेलों में बुधवार को महिला हॉकी टीम को भले ही हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन खिलाड़ियों के जुझारूपन ने देशवासियों का दिल जीत लिया।
सेमीफाइनल में महिला हॉकी टीम को मिली हार के बाद शहर निवासी खिलाड़ी नेहा गोयल व निशा वारसी की मां और मोनिका मलिक की दादी चंद्रपति ने कहा कि बेटियां बहुत संघर्षशील हैं। हार से सबक लेकर आगे बेहतर खेल दिखाएंगी। सभी को पूरी उम्मीद है कि बेटियां खाली हाथ नहीं लौटेंगी। वहीं, पूर्व कोच व खिलाड़ियों ने भी टीम के खेल की तारीफ की है।
वीडियो कॉल कर लिया था आशीर्वाद
शहर के वेस्ट रामनगर की रहने वाली हॉकी खिलाड़ी नेहा गोयल व कालूपुर निवासी निशा वारसी ने सुबह ही वीडियो कॉल कर अपनी मां से आशीर्वाद लिया था।
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टीम के पास अभी भी इतिहास रचने का मौका
महिला हॉकी टीम के पास अभी भी इतिहास रचने का मौका है। भारतीय टीम तीन बार की गोल्ड मेडलिस्ट आस्ट्रेलिया को हराकर सेमीफाइनल में आई थी। अब उसका मुकाबला कांस्य पदक के लिए ब्रिटेन से होना है। अगर टीम ये मुकाबला जीतती है तो 41 साल में पुरुष और महिला मिलाकर देश का हॉकी में पहला पदक होगा। टीम का जो प्रदर्शन रहा है, वो देश में इस खेल को नई ऊंचाई पर लेकर जाएगा। टीम के जुझारूपन ने सभी का दिल जीत लिया।
- प्रीतम सिवाच, कोच एवं पूर्व कप्तान, भारतीय महिला हॉकी टीम
हॉकी मैच देखती मोनिका मलिक की दादी व चाचा-चाची।- फोटो : Sonipat