देश में भले ही असहिष्णुता को लेकर साहित्यकारों के पुरस्कार लौटाने का
सिलसिला जारी है, लेकिन सरकार पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। यह बात
रविवार को बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी आए केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य
मंत्री हंसराज गंगराम अहीर ने कही। उन्होंने कहा कि दो साहित्यकारों के
सम्मान लौटाने से सरकार दबाव में नहीं आएगी। यह एक षडयंत्र के तहत किया जा
रहा है।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश में एकता रखने के
लिए विदेशों से सीखने की जरूरत नहीं है। हिंदू संस्कृति और संस्कार खुद
एकता का प्रतीक है, जो यहां का हर व्यक्ति जानता है। साहित्यकारों को लेकर
पूछे गए सवाल पर उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसा कुछ नहीं है और न ही इससे कुछ
होना वाला। दो साहित्यकारों के सम्मान लौटाने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
चीन की तर्ज पर बढ़ाएंगे यूरिया का उत्पादन, लगाए जाएंगे प्लांट
देश
में पिछले दिनों हुई खाद की किल्लत पर उन्होंने प्रदेश सरकारों के वितरण
प्रणाली को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने जितनी खाद की
डिमांड की थी, उतनी मुहैया करा दी गई थी। प्रदेश स्तर पर खाद की वितरण
प्रणाली सही नहीं रही। कुछ लोगों ने खाद की कालाबाजारी की, जिस कारण दिक्कत
हुई होगी। देश को नई टेक्नोलॉजी की जरूरत है। सरकार आने वाले दिनों में
चीन की तर्ज पर कोल से यूरिया उत्पादन करेगी। जगह-जगह यूरिया के प्लांट भी
लगाए जाएंगे। दाल की बढ़ती महंगाई पर कहा कि सरकार योजना बना रही है। देश
में प्याज और दाल का उत्पादन बढ़ाया जाएगा, जिसके बाद यह किल्लत नहीं होगी।