रोहतक। विधानसभा चुनाव में भाजपा व कांग्रेस के बीच सियासी मुद्दा रहे एलिवेटेड ट्रैक के विस्थापितों के पुनर्वास का मामला नगर निगम में आकर अटक गया है। सोमवार दोपहर पूर्व पार्षद अशोक खुराना के नेतृत्व में 33 विस्थापित दुकानदार मेयर मनमोहन गोयल से मिले और मांग पत्र सौंपते हुए निगम प्रशासन को सहमति पत्र देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें 9 गुणा 12 नहीं, 10 गुणा 14 फीट की दुकान पूरी मलकीयत के साथ चाहिए। नगर निगम उनकी दुकानों को तोड़कर बदले में केवल जमीन दे रहा है, वह भी पावर हाउस चौक पर मुख्य सड़क से 140 फीट अंदर, हमें यह मंजूर नहीं। इस पर मेयर ने कहा कि प्रोजेक्ट को बदलने की पावर उनके पास नहीं है। वे उनका प्रस्ताव सरकार के पास चंडीगढ़ भेज देंगे।
शहर की सियासत में गांधी कैंप का अहम स्थान है। क्योंकि विधानसभा क्षेत्र में बाहुल्य पंजाबी समुदाय की राजनीति कैंप से ही चलती है। रोहतक पानीपत वाया गोहाना रेलवे लाइन गांधी कैंप को दो भागों में बांटती है। कांग्रेस के मौजूदा विधायक भारत भूषण बतरा ने पहले कार्यकाल में केंद्र व राज्य सरकार ने उक्त लाइन को उखाड़कर बाईपास बनवाने और यहां पर माल रोड बनवाने का प्रस्ताव मंजूर कराया था। 2014 में प्रदेश के अंदर भाजपा की सरकार ने बाईपास का प्रस्ताव रद्द कर एलिवेटेड ट्रैक बनवाने का फैसला लिया। करीब 200 करोड़ की लागत से एलिवेटिड ट्रैक बन रहा है, जिसके साथ-साथ रोड भी बनाया जा रहा है। एलिवेटिड ट्रैक व रोड के निर्माण के चलते गांधी कैंप इलाके की एक साल पहले 33 दुकानों को 2 से 9 फीट तक तोड़ा गया था। इसके बदले में नगर निगम प्रशासन की तरफ से पावर हाउस चौक पर बिजली निगम की जमीन में दुकानदारों को मार्केट बनाकर दी जा रही है। साथ ही पीजीआईएमएस की जमीन में मकान बनाने का प्रस्ताव हाउस में पास हुआ था। निगम की तरफ से एक सप्ताह पहले पत्र जारी किया गया था कि जो दुकानदार 16 दिसंबर तक सहमति पत्र देगा, उसे निर्माणाधीन मार्केट में 9 गुणा 12 की दुकान की जगह अलॉट की जाएगी। सोमवार को नोटिस के बावजूद किसी दुकानदार ने सहमति पत्र नहीं दिया।
ये प्रस्ताव मंजूर नहीं
- नगर निगम 9 गुणा 12 की दुकान दे रहा है, जबकि उनकी 10 गुणा 14 की दुकान तोड़ी गई थी। उनको पूरी जगह चाहिए।
- निगम ने उनकी चालू मार्केट में दुकान तोड़ी, अब ऐसी जगह दुकान दी जा रही है, जहां कोई मार्केट नहीं है। दुकान चालू करने में लंबा समय लगेगा।
- पॉवर हाउस चौक पर कलेक्टर रेट 80 हजार रुपये प्रति वर्ग गज के करीब है, जबकि गांधी कैंप में 25 हजार रुपये प्रति गज के करीब बताया गया है। इस बीच के अंतर को निगम दुकानदारों से वसूलना चाहता है। जो अन्याय है।
- निगम दुकानदारों को केवल जगह दे रहा है। न केवल निर्माण की लागत राशि लेगा, बल्कि दुकान की छत की मलकियत भी नहीं दी जा रही है।
ये करे नगर निगम
- दुकानदारों को गांधी कैंप में तोड़ी दुकानों के बदले उतनी ही दुकान बनाकर दे।
- निगम की तरफ से उनसे कलेक्टर रेट का अंतर ही नहीं, कोई राशि न वसूल की जाए।
- निगम एक साल से रोजगार खो चुके दुकानदारों को रोजगार उपलब्ध कराए।
33 दुकानदारों के पास पक्की रजिस्ट्री
दुकानदारों के साथ अन्याय किया जा रहा है। एक साल पहले उनकी दुकान व मकान तोड़े गए। बावजूद इसके अभी तक दुकान बनाकर नहीं दी गई। जबकि सभी 33 दुकानदारों के पास पक्की रजिस्ट्री है। निगम ने पहले नहीं बताया कि उनको 9 गुणा 12 की दुकानें बनेंगी। वह भी बिना छत के। अब बताया है, इस कारण किसी भी दुकानदार ने अपना सहमति पत्र निगम को नहीं दिया। साथ ही मेयर को मांग पत्र दिया है, जिसमें सरकार से राहत दिलवाने की मांग की गई है।
हरिओम नागपाल, पीड़ित दुकानदार
मांग पत्र सरकार को भेज देंगे
रेलवे ट्रैक से विस्थापित दुकानदार उनसे मिलने आए थे। निगम की तरफ से पूरा प्रोजेक्ट बनाया जा चुका है। साथ ही दुकानों के निर्माण का टेंडर भी हो चुका है। अब मामला उनके हाथ में नहीं है। इसलिए मांग पत्र प्रदेश सरकार को चंडीगढ़ भेज देंगे।
मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम
आकर देखता हूं् पूरा मामला
सोमवार को मैं अवकाश पर था। मंगलवार को आकर पूरे मामले को देखता हूं। क्या मांग पत्र दिया गया है। प्रोजेक्ट कहां तक पहुंचा है।
-प्रदीप गोदारा, आयुक्त नगर निगम