सितंबर के आखिरी हफ्ते में बारिश कपास और बाजरा पर कहर बनकर बरसी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस अवस्था में बारिश से दोनों फसलों को काफी नुकसान होगा। उन्होंने उत्पादन घटने की आशंका भी जताई है।
ब्लॉक कृषि विकास अधिकारी डॉ. यशपाल दहिया ने बताया कि कपास की चुगाई शुरू हो चुकी है। पहली चुगाई हो भी चुकी है। सितंबर 2021 के अंत तक लगातार बारिश का अनुमान है। दूसरी चुगाई पर बारिश होगी तो फसल की निगेटिव ग्रोथ ज्यादा हो जाएगी। मौसम खराब रहने के कारण धूप नहीं निकलेगी। इससे फूल ज्यादा झड़ेंगे। इन सब चीजों के चलते कपास का उत्पादन घट जाएगा। इतना ही नहीं, आर्द्रता बढ़ने से कपास पर सफेद मक्खी, हरा तेला के हमले का खतरा भी बढ़ जाएगा। ऐसी ही स्थिति बाजरा के साथ है। बाजरा की फसल पक गई है तो जमाव शुरू हो जाएगा। भुट्टे में जमाव शुरू हो जाएगा। फसल गल जाएगी। बारिश से भुट्टों में दाने भी नहीं पड़ेंगे। ग्वार की फसल के लिए भी बारिश बहुत नुकसानदायक है।
बची हुई फसल के लिए बारिश नुकसानदायक
इस बार धान की रोपाई के समय अनुमान के बावजूद बारिश नहीं हुई, लेकिन अब बारिश सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है। लगातार बारिश से पहले ही कपास और बाजरा की काफी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। बची हुई फसल के लिए भी अब ये बारिश नुकसानदायक है। इस बार धान की फसल भी जलभराव के चलते खराब हो चुकी है।
ऊंचाई पर लगे धान को फायदा
ऊंचाई पर स्थिति खेतों में जहां धान लगाया गया है, उनके लिए बारिश फायदेमंद है। धान को एक और सिंचाई की जरूरत थी। बारिश से उसकी भरपाई हो गई है। हालांकि धान की 1509 किस्म के लिए बारिश नुकसानदायक है। जिले में ज्यादातर किसान 1121 वैराइटी लगाते हैं। इसी तरह जिन किसानों ने अगले रबी सीजन में सरसों की फसल लगानी है, उनके लिए भी बारिश फायदेमंद है।
-डॉ. यशपाल दहिया, ब्लॉक कृषि विकास अधिकारी