जाट भवन में जुटे जाटों ने सरकार और पुलिस-प्रशासन को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया
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भाजपा सरकार केंद्र से पहले प्रदेश में जाट आरक्षण लागू कर सकती है। केंद्र सरकार में भाजपा के जाट मंत्रियों और सांसदों के आरक्षण के पक्ष में एकजुट होने पर सरकार ने यह फैसला लिया है। वहीं, मिशन यूपी के तहत भी जाटों को केंद्र में आरक्षण देकर सरकार इसका फायदा उठाना चाहती है।
हरियाणा के जाटों ने प्रदेश और केंद्र में आरक्षण की मांग को लेकर झंडा बुलंद किया हुआ है तो अन्य कई प्रदेशों यूपी, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान आदि के जाट केंद्र में आरक्षण के लिए अड़े हैं। लेकिन जिस तरह से पिछले दिनों हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन शुरू होने के बाद उपद्रव हुआ, उसको देखते हुए सरकार सबसे पहले हरियाणा में आरक्षण देने की तैयारी दिखा रही है।
हालांकि सरकार व जाट नेताओं के बीच आरक्षण व्यवस्था को लेकर खींचतान चल रही है। सरकार बीसी-सी में आरक्षण देने की बात कह रही है तो जाट नेता बीसी-बी कोटे में दो प्रस्ताव सरकार के सामने रख चुके हैं। लेकिन हरियाणा में जाट आरक्षण पर कई अन्य प्रदेशों के जाटों की निगाह टिकी हैं। क्योंकि हरियाणा में जाटों को आरक्षण देने के बाद ही केंद्र में लागू करने की बात होगी।
सूत्रों के अनुसार भाजपा के जाट मंत्री संजीव बालियान, बीरेंद्र सिंह के अलावा सांसद धर्मबीर सिंह, सतपाल सिंह, बाबूलाल चौधरी, कुंवर भारतेंदु आदि केन्द्र में आरक्षण के लिए एकजुट होकर सरकार के सामने पैरवी कर रहे हैं। फिलहाल सभी की निगाह हरियाणा पर टिकी है कि आखिर यहां जाटों को आरक्षण कब तक मिलता है? जाट आरक्षण केंद्रीय कमेटी के सदस्य और केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान कहते हैं कि सरकार शुरुआत से जाटों को आरक्षण देने के लिए प्रयासरत है। फिलहाल हरियाणा में जल्द ही आरक्षण मिल जाएगा और उसमें कोई संदेह ही नहीं है। इसके बाद केंद्र में आरक्षण दिया जाएगा, जिसका फायदा सभी प्रदेशों में मिलेगा।