साउथ अफ्रीका में तेजी से फैल रहा कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट डेल्टा व अन्य वैरिएंटों की तुलना में अधिक तेज है। यह कितना खतरनाक साबित होगा, यह समय बताएगा। उम्मीद की जा सकती है कि जिन लोगों ने कोवैक्सीन की दोनों डोज लगवा ली हैं, उनको इसका असर कम होगा। इस वैक्सीन में कोरोना का पूरा वायरस लिया गया है, इसलिए यह इससे लड़ने में कारगर होगा।
पीजीआईएमएस में कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर एवं कोवैक्सीन के अनुसंधानकर्ता डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि ओमिक्रॉन ने डेल्टा वैरिएंट की भयावह स्थिति को एक बार फिर जिंदा कर दिया है। क्योंकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों को यह नहीं पता कि यह वायरस कितना जानलेवा साबित होगा। क्योंकि अभी यही कहा जा सकता है कि इसके फैलने की क्षमता पिछले वैरिएंटों की तुलना में अधिक तेज है। इस वायरस से बचाने के लिए कई प्रकार के टीके हैं। डॉ. वर्मा ने बताया कि एल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा के बाद अब पांचवां वैरिएंट आया है। हालांकि इनके स्ट्रेेन की बात करें तो इनकी संख्या बहुत अधिक है। इस वायरस से आने वाले समय में कितनी मौत हो सकती है, कहा नहीं जा सकता।
बुजुर्गों व क्रोनिक बीमारी वालों को अधिक जागरूक होने की जरूरत
कोरोना के नए वैरिएंट को देखते हुए बुजुर्गों व क्रोनिक बीमारी वालों को अधिक जागरूक होने की जरूरत है। क्योंकि उपलब्ध वैक्सीन का इस वैरिएंट पर क्या असर रहेगा, अभी नहीं कहा जा सकता। कोवैैक्सीन से अधिक उम्मीद इसलिए है कि इसमें पूरा वायरस लिया गया था। इसलिए उम्मीद है कि इसका पूरा असर देखने को मिलेेगा।
देश में केस नहीं, लेकिन हलके में न लें
डॉ. रमेश वर्मा ने लोगों से अपील की है कि अभी नया वैरिएंट देश में नहीं है। लेकिन इसको हलके में न लें। क्योंकि यदि संक्रमण आता है तो इसके फैलने की क्षमता पहले की तुलना में अधिक तेज होगी। इसलिए कोरोना से बचाव के अपने तरीकों को अपनी नियमित आदत में शामिल करें। हमारे पास इस वायरस से बचने के लिए जारी गाइडलाइन की पालना और टीकाकरण ही प्रमुख उपाय है। पहला वैरिएंट चीन से शुरू हुआ था और अब पांचवां वैरिएंट साउथ अफ्रीका से फैल रहा है। यह वायरस वातावरण में रहेगा, इसके लक्षण के आधार पर ही हमें बचाव करना होगा।