समय पर नहीं संभले तो हेपेटाइटिस-बी का वायरस लीवर को खराब कर मरीज की जान ले सकता है। यह रक्त के संक्रमण, बार-बार एक सुई के प्रयोग, डायलिसिस कराने वाले मरीजों व असुरक्षित यौन संबंध से हो सकता है। इससे बचने के लिए समय पर बीमारी की पहचान व उपचार जरूरी है। इसमें लापरवाही व अज्ञानता अधिक घातक है। राहत की बात है कि इसकी जांच और दवाएं देशभर में निशुल्क हैं। यदि व्यक्ति समय पर जांच करवाए और उपचार ले तो उसे बचाया जा सकता है।
नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम 2018 के तहत हेपेटाइटिस बी के मरीजों को देशभर में निशुल्क जांच व उपचार की सुविधा मिलती है। प्रदेश के मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर पीजीआईएमएस की बात करें तो यहां इस वर्ष जून 2021 तक 5500 के करीब मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। इसके अलावा एक हजार के करीब अन्य जिलों के सरकारी अस्पतालों में भी संक्रमित मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। मरीजों की पहचान करने के लिए सरकार ने जिला स्तर पर जांच किट उपलब्ध करवा रखी है। पीजीआईएमएस के मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर पर प्रदेश भर से मरीज जांच करवाने व उपचार के लिए आते हैं। यहां हेपेटाइटिस बी के मरीजों की जांच के लिए फाइब्रोस्कैन, एंडोस्कोपी, जांच किट व दवाएं उपलब्ध हैं। विभाग की ओर से बगैर वेटिंग मरीजों को उपचार दिया जा रहा है।
अभिनेता अमिताभ बच्चन हैं योजना के ब्रांड एंबेसडर
एनवीएचसीपी प्रोग्राम के ब्रांड एंबेसडर अभिनेता अमिताभ बच्चन हैं। 2018 में योजना के शुभारंभ पर आयोजित कार्यक्रम में अभिनेता ने कहा था कि वह स्वयं इस संक्रमण से पीड़ित हैं। उनका 70 प्रतिशत लीवर संक्रमण के कारण खराब हो चुका है, लेकिन दवाओं से उन्हें आराम हैं। वह बीमारी व अधिक उम्र होने के बावजूद अपना काम कर रहे हैं। दुख होता है जब पता चलता है कि लोग अपनी बीमारी छिपाते हैं। इसके लिए जागरूकता जरूरी है। इस कार्यक्रम में हरियाणा की ओर से मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर पीजीआईएमएस के प्रभारी एवं वरिष्ठ गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने शिरकत की थी।
जीवन भर चलता है उपचार, 20 प्रतिशत को होती है दवा की जरूरत
हेपेटाइटिस बी का मरीज जीवन भर फॉलोअप पर रहता है। इसमें खास यह है कि 80 प्रतिशत को दवा की जरूरत नहीं होती, लेकिन शेष 20 प्रतिशत को यदि दवा न मिले तो उसका जीवन खतरे में आ जाता है। हेपेटाइटिस बी वायरस में लीवर कैंसर, लीवर को खराब करने की क्षमता है। देश में दो से चार प्रतिशत इससे संक्रमित मरीज हैं, जोकि अलग-अलग राज्यों में भिन्न-भिन्न हैं। हरियाणा में भी दो से चार प्रतिशत संक्रमण है, जोकि अलग-अलग जिलों में अलग-अलग प्रतिशत में है।
पहले आता था हजारों खर्च अब है निशुल्क
हेपेटाइटिस बी के मरीज को पहले हजारों रुपये खर्च करने पड़ते थे। इसमें जांच के लिए 5 हजार, अन्य रक्त जांच के लिए 3 हजार, फाब्रोस्कैन के 3 हजार, एंडोस्कोपी के लिए 3 हजार रुपये खर्च करने पड़ते थे। यह जांच हर छह माह में अनिवार्य होती है। इसके अलावा यदि दवा शुरू होती है इसकी प्रतिमाह कीमत 1500 रुपये होती है। यह खर्च अब सरकार वहन कर रही है।
8 से 10 साल में लीवर हो जाता है खराब
हेपेटाइटिस बी में समस्या है कि यह 8 से 10 साल में लीवर को खराब कर देता है। शुरुआत में इस संक्रमण का पता ही नहीं चल पाता। जब लीवर में सूजन, खून की उल्टी आदि लक्षण आते हैं तो जांच होने पर संक्रमण का पता चलता है। एक बार लीवर खराब होने पर लीवर डोनर की तलाश के साथ 20 से 25 लाख रुपये ट्रांसप्लांट का खर्च वहन करना पड़ता है।
कितना होना चाहिए वायरल लोड
हेपेटाइटिस बी की जांच में यदि मरीज को एक लाख का लोड आ रहा है और लीवर पर दबाव आ रहा है तो दवा शुरू करना अनिवार्य होता है। यदि वायरल लोड एक लाख से नीचे हैं और लीवर पर दबाव नहीं है तो मरीज को हर छह माह पर जांच करवानी अनिवार्य होती है। जब मरीज के लीवर पर दबाव बढ़ता है तो दवा शुरू की जाती है। इसमें मरीज के लिए जरूरी है कि वह लीवर को खराब करने जैसे कारणों से बचें। इसमें मोटापा, नशा, धूम्रपान से बचना अनिवार्य होता है।
हेपेटाइटिस बी का आंकड़ा
- ग्रामीण में 70 व शहर में 30 प्रतिशत
- पुरुष 67 प्रतिशत व महिला 33 प्रतिशत
- 76 प्रतिशत क्रॉनिक मरीज
- 14 प्रतिशत में वायरस एक्टिव
- 10 प्रतिशत में एक्यूट वायरस
- 14 प्रतिशत में 2.85 प्रतिशत ने बीच में छोड़ा उपचार
- 71 मरीजों में लीवर सिरोसिस और 10 में कैंसर मिला
- 71 मरीजों में 52 पुरुष और 18 महिलाएं सिरोसिस की स्थिति तक पहुंचे
सरकार की ओर से हेपेटाइटिस-बी के मरीजों को निशुल्क जांच व दवाओं की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। पीजीआईएमएस में प्रदेश का मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर है। यहां लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए उपचार करने के साथ जागरूक भी किया जाता है। उपचार के लिए आने वाले मरीजों की यह जांच भी करवाई जाती है ताकि बीमारी का समय रहते पता चल सके।
- डॉ. एचके अग्रवाल, रजिस्ट्रार एवं वरिष्ठ फिजिशियन, पीजीआईएमएस