एमडीयू के गुलाब वाटिका में पुष्प प्रदर्शनी रंगबहार में हरियाणा के धरोहर को दिखाते राघवेन्द्र ।
रोहतक। शहर के 70 साल के राघवेंद्र को हरियाणा की विरासत को संजोकर रखने का शोक है। उनके पास घरों में प्रयोग होने वाले सदियों पुराने बर्तन और खेती बाड़ी के यंत्रों का खजाना है। एमडीयू के आयोजित पुष्प प्रदर्शनी में उन्होंने इसका स्टॉल लगाया तो अपनी विरासत देखने के लिए युवाओं का तांता लग गया। छात्र-छात्राओं ने भी देखा कि उनके पूर्वज घरों में कैसे बर्तन प्रयोग करते थे।
राघवेंद्र ने प्रदेश के गांव, कस्बों और शहरों में घूमकर यहां की विरासत से जुडे़ सामान एकत्रित किए हैं। जहां भी कोई विरासत से जुड़ी चीज होने की जानकारी मिलती वहीं पर वे दौड़ पड़ते हैं। इनके पास उपलब्ध सामान प्रदर्शनी में रखे गए थे। जो युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। युवाओं में ये जानने की ललक नजर आई। प्रदर्शनी में जूट से बनी नोली थी इसमें पुराने समय में लोग चांदी के सिक्कों को छिपाकर रखते थे। 250 साल पहले घरों में लोग तलवार रखने का शौक रखते थे। उन्होंने तलवार भी प्रदर्शनी में रखी थी। पुराने समय में मिट्टी और पीतल के बर्तनों में खाना पकाया जाता था। वे बर्तन भी आकर्षण का केंद्र बने थे।
राघवेंद्र का दावा है कि पुराने लोग मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाते थे जो सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता था। दूध, मट्ठी की पतीली रखने वाली लकड़ी और रस्सी से बना स्टैंड भी युवाओं को काफी पसंद आया। पुराने दौर में लाइट नहीं थी इसलिए लोग घरों में सरसों का तेल डालकर दीपदान जलाया करते थे। वे दीपदान भी प्रदर्शनी में युवाओं को काफी रास आए। छात्र गार्गी, कविता, कोमल, अंजली, दिव्या, प्रतिभा ने बताया कि उनके दादी दादा इतने बर्तनों के बारे में बताते थे, लेकिन आज प्रदर्शन में पहली बार उन्हें देखा।
खूब ली सेल्फी
प्रदर्शनी में आए युवा अपनी पुरानी विरासतों को हाथ में लेकर सेल्फी ले रहे थे। कुछ फोटोग्राफी कराते नजर आए। दिव्या ने बताया कि उन्हें फल रखने वाली गत्ते की टोकरी काफी पसंद आई। कोमल को खाना रखने का बर्तन और कविता को दीपदान काफी अच्छा लगा। युवा इन्हें हाथ में लेकर सेल्फी ले रहे थे और फोटोग्राफी भी करा रहे थे।