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हरियाणा दिवस विशेष: तीन राज्यों की ऐतिहासिक पंचायत में फैसले के बाद 1912 में रोहतक में खुला जाट स्कूल

Mon, 01 Nov 2021 05:39 AM IST
भूपेंद्र सिंह अखिल तलवार, अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक(हरियाणा)

सार

  • अंग्रेजी हुकूमत के दबाव में नाम बदल कर जाट एंग्लो संस्कृत हाई स्कूल किया गया
  • स्कूल को डीएवी संस्था को देने का उठा था विचार पर बुजुर्गों ने मना कर दिया
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जाट कॉलेज रोहतक। - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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खरखौदा, सोनीपत के गांव बरोणा में सात मार्च 1911 को जाटों की ऐतिहासिक पंचायत हुई। जिसमें हरियाणा (तब पंजाब), पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के जाटों ने हिस्सा लिया। पंचायत की अध्यक्षता डॉ. भीम सिंह ने की, इसका सारा खर्च दहिया खाप ने उठाया। पंचायत में फैसला लिया गया कि रोहतक में जाट स्कूल खोला जाएगा। चौधरी मातू राम, डॉ. रामजी लाल आदि ने जगह तलाशनी शुरू की। 1912 में नीमो वाली कोठी (वर्तमान में पुलिस चौकी, सब्जी मंडी) में स्कूल की शुरूआत हुई। बाद में गांव बोहर से जमीन मिलने पर इसे वर्तमान जगह स्थापित किया गया।
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शुरू में इसका नाम जाट वैदिक हाई स्कूल रखा गया था। जिसकी मान्यता पंजाब यूनिवर्सिटी, लाहौर से ली गई थी। लेकिन अंग्रेजी हुकूमत के दबाव में इसका नाम बदल कर जाट एंग्लो संस्कृत हाई स्कूल रखना पड़ा। चौधरी बलदेव सिंह इसके पहले प्राचार्य थे, स्कूल की स्थापना में उनका काफी योगदान था। 1925 चौधरी बलदेव ने महात्मा हंसराज को स्कूल में बुलाया। तब स्कल को डीएवी संस्था को देने का विचार उठा, लेकिन संस्था बुजुर्गों ने नकार दिया।

चवन्नी, अठन्नी दान कर देते थे फौजी
जाट स्कूल जनता के चंदे से ही चलता था। स्कूल को लेकर समाज में इतना उत्साह था कि फौजी अपनी दो रुपये तनख्वाह में से चार आने या आठ आने दान कर देते थे। किसी के पास पैसे नहीं होते थे तो वह अनाज दे देते थे। कुछ लोग आर्थिक सहायता न देकर स्कूल के निर्माण में मुफ्त मजदूरी करते थे।
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1944 में हुई जाट कॉलेज की स्थापना
जाट हाई स्कूल चल रहा था लेकिन इस क्षेत्र में कोई उच्च शिक्षण संस्थान नहीं था। हरियाणा (तब पंजाब) से बड़ी संख्या में युवाओं ने पहले और दूसरे विश्व युद्ध में हिस्सा लेकर कुर्बानियां दी थीं। इसी दौरान कुछ प्रबुद्धजनों ने चौधरी छोटू राम से प्रेरणा लेकर उच्च शिक्षा की आवश्यकता और महत्व को समझा। इसी के बाद विश्व युद्ध में शहादत देने वालों की याद में 1944 में अखिल भारतीय जाट सूरमा स्मारक महाविद्यालय की स्थापना की गई। समाज के लोगों ने अपनी आस्था के अनुसार धन, अन्न व श्रम दान दिया, तब जाकर इसकी शुरूआत हुई। उस समय यह पंजाब यूनिवर्सिटी, लाहौर से संबद्ध था। फिर पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और अब एमडीयू से संबद्ध है। आज 40 एकड़ में फैले इस कॉलेज में करीब 7800 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

एलुमनी
  • डॉ. सरूप सिंह - पूर्व राज्यपाल
  • प्रो. शेर सिंह - पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री
  • सतबीर कादियान - पूर्व स्पीकर, हरियाणा विधानसभा
  • गोपीचंद गहलोत - पूर्व डिप्टी स्पीकर, हरियाणा विधानसभा
  • कैप्टन इंद्र सिंह - पूर्व सांसद
  • किशन सांगवान - पूर्व सांसद
  • महा सिंह - पूर्व मंत्री हरियाणा

शिक्षा के क्षेत्र में तब भी और अब भी है धाक, अब सुपवा, आईआईएम, दो विवि, एफडीडीआई और 16 कॉलेज हैं
शिक्षा के क्षेत्र में रोहतक का दबदबा आजादी के काफी पहले से कायम था और आज भी है। तब वैश्य और जाट शिक्षण संस्थानों की पूरे उत्तर भारत में धाक थी। दूर-दूर से विद्यार्थी यहां पढ़ने आते थे। आज भी शिक्षा के क्षेत्र में जिले का दबदबा कायम है। उत्तर भारत में अपनी तरह का एकमात्र संस्थान पंडित लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स जिले की शान है। इसके अलावा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की स्थापना हो चुकी है। शहर में एक राज्य विश्वविद्यालय महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी और एक निजी विश्वविद्यालय बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी हैं। जिले में आठ-आठ सरकारी और एडेड कॉलेज हैं। इसके अलावा फुटवियर डिजाइनिंग एंड डेवलपमेंट इंस्टीटट्यूट भी रोहतक में है।
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