प्रदेश के कृषि मंत्री जेपी दलाल का कहना है कि जिले के लाहली गांव में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जाएगी। इसके लिए मंगलवार को कृषि मंत्री लाहली गांव में पहुंचे और मत्स्य केंद्र के वैज्ञानिकों से बातचीत की। दलाल ने कहा कि प्रदेश में जहां-जहां जमीन का पानी खारा है, वहां-वहां प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जाएंगी। इसी क्रम में लाहली का चयन किया गया है। इससे किसान मत्स्य के अपने उत्पाद का सीधा निर्यात कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में कोई भी प्रोसेसिंग यूनिट नहीं है। बीज भी हैदराबाद से लाना पड़ता है। ऐसे में यहां के मत्स्य उत्पाद को हैदराबाद के व्यापारी ही खरीद लेते हैं। उन्होंने कहा कि यहां पर प्रोसेसिंग यूनिट लगने से कोई भी किसानों का शोषण नहीं कर पाएगा। इसके लिए जल्द लाहली में प्रयोगशाला का शुभारंभ होगा। उन्होंने कहा कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए परंपरागत खेती से हटकर बागवानी, डेयरी प्रोसेसिंग व मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मत्स्य पालन एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें 100 फीसदी रिटर्न है। उन्होंने कहा कि पहले वर्ष में ही लागत पूरी होने के साथ-साथ लाभ भी मिल जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे किसान है, जिन्होंने ढाई एकड़ में मत्स्य पालन कर 4 महीने में 30-30 लाख रुपये तक का लाभ कमाया है। उन्होंने कहा कि ढाई एकड़ में मत्स्य पालन करके कम से कम 10 से 15 लाख रुपये का लाभ सुनिश्चित है। प्रदेश में लाखों एकड़ भूमि खारे पानी की है, जिसका प्रयोग मत्स्य पालन के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही कृषि मंत्री ने लाहली गांव निवासी राजकुमार व अनिल के कृषि मत्स्य फार्म का निरीक्षण भी किया। इस अवसर पर एसडीएम राकेश कुमार सैनी, मत्स्य विभाग के रोहतक डिवीजन के उप निदेशक रमेश कुमार दांगी, जिला मत्स्य अधिकारी आशा हुड्डा तथा मत्स्य अधिकारी अनिल सिंह भी मौजूद रहे।
सुबह अचानक बना कृषि मंत्री का प्रोग्राम
हुआ यूं कृषि मंत्री जेपी दलाल को मंगलवार को दिल्ली से भिवानी जाना था। सुबह उन्होंने विभाग के अधिकारियों से कहा कि वे तीन बजे लाहली स्थित मत्स्य पालन केंद्र का निरीक्षण करेंगे। साथ ही विभाग के वैज्ञानिकों से खारे पानी में मछली पालन को लेकर फीडबैक लेंगे।