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जारी है आंदोलन : कृषि कानून वापसी की घोषणा के बाद भी बॉर्डर पर डटे हैं किसान

Sun, 21 Nov 2021 06:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा शील भारद्वाज, बहादुरगढ़

सार

टीकरी बॉर्डर पड़ाव में शनिवार को भी सामान्य दिनों की तरह चलीं गतिविधियां।
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टीकरी बॉर्डर पर सभा में आईं महिला किसान... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा करने के बाद शनिवार को भी टीकरी बॉर्डर पर किसान धैर्य के साथ डटे रहे। आंदोलनकारियों के टीकरी बॉर्डर पड़ाव में गतिविधियां सामान्य रूप से चलती रहीं। आंदोलनरत किसानों में घर लौटने के लिए कोई जल्दबाजी नहीं है।

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टीकरी बॉर्डर से जाखोदा गांव, सेक्टर-9 मोड़ से बहादुरगढ़ सिटी मेट्रो स्टेशन, सेक्टर-9 में, 10 में और सेक्टर-13 तक 20 किलोमीटर तक लंबे टेंटों, ट्रैक्टर ट्रॉलियों व झोपड़ियों के काफिले में 10 हजार से अधिक किसान पहले की तरह जमे हैं। शनिवार को भी किसानों के पड़ाव में टीकरी बार्डर, सेक्टर-9 मोड़, बाइपास पर पेट्रोल पंप के निकट और नयागांव चौक समेत कई स्थानों पर लंगर चलता रहा। बॉर्डर पर आंदोलनकारियों को भोजन परोस रहे कुलविंदर सिंह ने कहा कि हम पर गुरुओं की कृपा है। मोदी की घोषणा उसी का नतीजा है।

किसानों के टीकरी बॉर्डर पड़ाव में आंदोलनकारियों की संख्या भले ही कम हो गई है, लेकिन ये नहीं कहा जा सकता कि आंदोलन टूटने की हद तक कमजोर हो गया हो। अन्य दिनों की तरह दोनों बड़ी सभाएं हुईं। बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की सभा और नयागांव चौक के पास गदरी बीबी गुलाब कौर नगर में भारतीय किसान यूनियन एकता (उग्राहां) की सभा में भी उत्साह की कमी नहीं थी। कई जगह टोलियों में बैठे किसान चर्चा में मशगूल दिखाई दिए। प्रधानमंत्री की घोषणा से किसानों का हौसला बढ़ गया है। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के राज्य सचिव जयकरण ने कहा कि प्रजा की एकता ने राजा की निरंकुशता पर विराम लगा दिया है।
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किसान नेता बोले, एमएसपी लेकर ही जाएंगे घर
टीकरी बॉर्डर पर शनिवार को हुई सभा में किसान नेताओं ने कहा कि तीन कृषि कानूनों के संसद में निरस्त होने और न्यूनतम समर्थन मूल्य कानून बनने समेत सभी मांगें पूरी होने से पहले वे घर नहीं जाएंगे। उन्होंने आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने और प्रभावित परिवारों को राहत देने की मांग की।

कुल हिंद किसान सभा पंजाब के प्रधान सुरिंदर सिंह झंडियां ने कहा कि पीएम मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने के एलान से वे खुश हैं, लेकिन एमएसपी पर कानून बनने से पहले हम मानने वाले नहीं हैं। इतना ही नहीं, शहीद किसानों को न्याय दिलाने और मुकदमे रद्द करने के बाद ही यहां से लौटेंगे। बीकेयू हरियाणा के सचिव जियालाल ने कहा कि यह सरकार किसानों के सामने झुक गई है। हमारे शहीद हुए किसानों के बच्चों को सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए। हमारे आंदोलन में 800 से ज्यादा किसानों की शहादत हो चुकी है। अब हमारी जीत नजदीक है। जब तक एमएसपी गारंटी नहीं मिल जाती हम वापस नहीं जाएंगे।

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