फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लॉकडाउन से ही बंद हुई ट्रेनों के कारण स्टेशन वेंडरों की बिक्री घटी, खर्च बढ़े

विज्ञापन
विज्ञापन
रोहतक। लॉकडाउन के बाद से ही रेलवे स्टेशन पर मुख्य ट्रेनों सहित करीब 40 प्रतिशत ट्रेनों का संचालन बंद पड़ा है। ट्रेनों का संचालन बंद होने के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं इससे स्टेशन पर सामान बेचने वाले रेलवे के वेंडरों की कमाई पर भी असर पड़ा है। उनकी बिक्री घट गई है जबकि खर्च पहले जैसे ही हैं।
विज्ञापन

बता दें कि रोजाना आने-जाने वाले सैकड़ों यात्री ट्रेन से यात्रा करते हैं। इनमें रोजाना सफर करने वाले एमएसटी (मासिक सीजनल टिकट) धारक भी होते हैं। लॉकडाउन के कारण 40 प्रतिशत ट्रेनों के बंद होने से यात्रियों की संख्या कम हुई है। यात्रियों की संख्या कम होने से वेंडरों की कमाई पर गहरा असर पड़ा है।
रेलवे स्टेशन पर तीन ठेकेदारों के पास 25 दुकानें व रेहड़ियां लगाने के स्थान हैं। 16 दुकानें व रेहड़ियां कोरोना के बाद से ही बंद पड़े हैं। वहीं 9 दुकानें व रेहड़ियां अभी स्टेशन पर पैकेट बंद सामान बेचने का काम करते हैं। सामान बेचने वालों के अनुसार एक दुकान पर दिनभर में मुश्किल से 400 रुपये की बिक्री होती है, जिससे उनका खर्च भी पूरा नहीं निकल पाता। वहीं वेंडरों का कहना है कि इस दौरान रेलवे उनसे किराया भी पूरा वसूल रहा है। हावड़ा एक्सप्रेस, जनता एक्सप्रेस, एकता एक्सप्रेस जैसी मुख्य ट्रेनें बंद हैं। पैसेंजर ट्रेनों का संचालन भी सुचारु रूप से नहीं हुआ है। जिस कारण प्रतिदिन यात्रा करने वाले नौकरीपेशा, विद्यार्थियों की संख्या बिल्कुल कम हो गई है। संवाद
विज्ञापन

बॉक्स-
बिजली का बिल कमाई से ज्यादा आया
कोरोना से पहले दिन भर में करीब पांच हजार रुपये की बिक्री हो जाती थी। अब बिक्री घटकर 400-500 रुपये रह गई है। पैकेट बंद सामान बेचने पर करीब 10 प्रतिशत आमदनी होती है। इस हिसाब से प्रतिदिन हमारी कमाई 50-100 रुपये ही होती है। अबकी बार दो महीने का बिजली का बिल करीब 12 हजार रुपये आया है। सबसे बड़ी बात यह है कि रेलवे हमसे किराया भी 100 प्रतिशत वसूल रहा है।
- मुबारक, वेंडर, शॉप नं. 3, रेलवे स्टेशन
बॉक्स -
खर्च निकालना हुआ मुश्किल
हमारी फर्म ने करीब 45 वर्ष से रेलवे स्टेशन पर वेंडर दुकानों का ठेका ले रखा है। मेरे पास दो स्टॉल व छह ट्रॉलियां लगाकर सामान बेचने का ठेका है, जिसकी सालाना फीस करीब 10 लाख रुपये जमा करवाई है। कोरोना के बाद ट्रेनों का संचालन सुचारु रुप से न होने के कारण स्टेशन पर यात्रियों की संख्या बेहद कम रहती है। बिक्री न होने से रोजाना नुकसान हो रहा है।
- सत्येंद्र रंगा, कांट्रेक्टर, प्यारे लाल एंड सन्स फर्म
वर्जन -
कोरोना के दौरान यात्रियों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार ने यात्री ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया था। धीरे-धीरे बंद पड़ी ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। वर्तमान में करीब 60 प्रतिशत ट्रेनों का संचालन हो रहा है। अन्य ट्रेनों का संचालन भी केंद्र सरकार की अनुमति से भविष्य में हो जाएगा।
विज्ञापन

- बी एस मीना, स्टेशन अधीक्षक, रोहतक रेलवे स्टेशन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें